पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: सुप्रीम कोर्ट का अहम निर्देश
वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए न्यायाधिकरणों को 'तत्काल सुनवाई' का आदेश

,पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में हुए ऐतिहासिक मतदान के बीच, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (24 अप्रैल) को एक अहम निर्देश जारी किया है। सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य में मतदाता सूची के ‘विशेष गहन संशोधन’ (Special Intensive Revision – SIR) के बाद, मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने अपीलीय न्यायाधिकरणों (Appellate Tribunals) को निर्देश दिया है कि वे उन लोगों की अपीलों पर ‘बिना बारी के’ (out-of-turn) यानी तत्काल सुनवाई करें, जो मतदाता सूची में अपना नाम जोड़ने के लिए तत्काल सुनवाई की मांग कर रहे हैं।
CJI ने की रिकॉर्ड मतदान की सराहना
सुनवाई की शुरुआत में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में हुए बंपर मतदान पर खुशी व्यक्त की। राज्य की 152 विधानसभा सीटों पर पहले चरण में 92.72 प्रतिशत का शानदार रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया है। सीजेआई ने इस ऐतिहासिक आंकड़े पर टिप्पणी करते हुए कहा, “भारत के एक नागरिक के रूप में, मैं मतदान प्रतिशत देखकर बहुत खुश हूं। जब लोग मतदान के अपने अधिकार का प्रयोग करते हैं, तो इससे लोकतांत्रिक ढांचा मजबूत होता है।”
ममता बनर्जी की याचिका पर हो रही थी सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। शीर्ष अदालत राज्य में मतदाता सूची के एसआईआर (SIR) से संबंधित याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा दायर याचिका भी शामिल है। सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची से बाहर किए गए व्यक्तियों से अपनी शिकायतों के निवारण के लिए अदालत द्वारा नियुक्त 19 अपीलीय न्यायाधिकरणों से संपर्क करने को कहा है। पीठ ने न्यायाधिकरणों से उन आवेदनों को प्राथमिकता देने को कहा जिनमें नाम जुड़वाने की तत्काल आवश्यकता बताई गई है।
शांतिपूर्ण चुनाव पर सॉलिसिटर जनरल की प्रतिक्रिया
इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी भारी मतदान की सराहना की। इसके अलावा, उन्होंने राज्य में शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय बलों की भूमिका की भी प्रशंसा की, क्योंकि पश्चिम बंगाल का चुनावी इतिहास हिंसा से प्रभावित रहा है। दूसरी ओर, वरिष्ठ अधिवक्ता और टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने भी पहले चरण में बंपर वोटिंग का स्वागत किया। हालांकि, उन्होंने अदालत को बताया कि अपीलीय न्यायाधिकरणों द्वारा अब तक केवल 139 दावों या अपीलों का ही फैसला किया गया है, जबकि लगभग 27 लाख ऐसे लोग हैं जो अपनी सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं।
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि वह मतदाता सूची में बने रहने के “अधिक मूल्यवान अधिकार” पर बाद में विस्तार से विचार करेगी। इस फैसले से उन लाखों मतदाताओं में उम्मीद जगी है, जिनके नाम तकनीकी कारणों से कट गए थे।



