पासपोर्ट आवेदकों के लिए बड़ा फैसला
लंबित आपराधिक मामले पासपोर्ट आवेदन खारिज करने का आधार नहीं हो सकते - आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

: आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने देश के लाखों पासपोर्ट आवेदकों को बड़ी राहत देते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण कानूनी फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि केवल आपराधिक मामले लंबित होने के आधार पर क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय किसी भी नागरिक का पासपोर्ट आवेदन खारिज या होल्ड पर नहीं रख सकता है।
जस्टिस बट्टू देवानंद की पीठ ने पासपोर्ट अधिकारियों के फैसलों को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई करते हुए यह सख्त टिप्पणी की। कई बार देखा गया है कि नागरिकों के खिलाफ छोटे-मोटे या झूठे आपराधिक मामले दर्ज होने पर भी उनका पासपोर्ट रोक दिया जाता है, जिससे उनके विदेश में पढ़ाई करने या नौकरी पाने के अवसर खत्म हो जाते हैं।
न्यायालय ने कहा कि पासपोर्ट अधिनियम के तहत अधिकारियों को मनमानी करने की छूट नहीं है। पासपोर्ट अधिकारी नए पासपोर्ट जारी करने, उनके रिन्यूअल (नवीनीकरण) या री-इश्यू (पुनः जारी) करने के आवेदनों को सिर्फ इस आधार पर रोक कर नहीं रख सकते कि आवेदक के खिलाफ कोई आपराधिक कार्यवाही निचली अदालतों में पेंडिंग है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत विदेश यात्रा का अधिकार भी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि गंभीर मामलों में आवेदक को विदेश यात्रा करने से पहले संबंधित ट्रायल कोर्ट से अनुमति (NOC) लेनी आवश्यक होगी, लेकिन पासपोर्ट कार्यालय आवेदन को सिरे से खारिज करने का अधिकार नहीं रखता। यह फैसला प्रशासनिक अधिकारियों की मनमानी पर लगाम लगाने वाला माना जा रहा है।



