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नाबालिग निशानेबाज के यौन उत्पीड़न आरोपों के बाद कोच अंकुश भारद्वाज निलंबित

भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) ने निशानेबाजी कोचिंग ढांचे से जुड़े एक गंभीर विवाद के बीच अपने कोचिंग स्टाफ के प्रमुख सदस्य अंकुश भारद्वाज को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई उस समय की गई है जब एक नाबालिग महिला निशानेबाज ने राष्ट्रीय चैंपियनशिप के दौरान उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है।

एनआरएआई ने पुष्टि की है कि हरियाणा के फरीदाबाद में भारद्वाज के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। मोहाली निवासी भारद्वाज पर पॉस्को अधिनियम की धारा छह, जो गंभीर यौन उत्पीड़न से संबंधित है, और भारतीय न्याय संहिता की धारा 351(2), जो धमकी से जुड़ी है, के तहत मामला दर्ज किया गया है।

एनआरएआई के सचिव राजीव भाटिया ने एक समाचार एजेंसी से बातचीत में बताया कि संघ ने भारद्वाज को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है और उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। भाटिया के अनुसार, यह निलंबन नैतिक आधार पर किया गया है और जांच पूरी होने तक भारद्वाज किसी भी प्रकार की कोचिंग गतिविधि में शामिल नहीं रहेंगे। उन्होंने कहा कि अब भारद्वाज को स्वयं को निर्दोष साबित करना होगा।

भाटिया ने यह भी स्पष्ट किया कि पेरिस ओलंपिक 2024 के बाद गठित 37 सदस्यीय कोचिंग टीम के लिए भारद्वाज के नाम की सिफारिश एनआरएआई ने की थी, जिसके आधार पर भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) ने उन्हें कोच नियुक्त किया था। उन्होंने कहा कि कथित घटना सूरजकुंड क्षेत्र में हुई है।

साभार : गूगल

पीड़िता द्वारा दर्ज एफआईआर के अनुसार, यह घटना पिछले महीने दिल्ली स्थित करणी सिंह शूटिंग रेंज में एक अभ्यास सत्र के बाद हुई। 17 वर्षीय निशानेबाज, जो अगस्त 2023 से भारद्वाज के साथ प्रशिक्षण ले रही थी, ने बताया कि वह इस घटना के बाद गहरे सदमे में चली गई थी। बार-बार पूछे जाने पर उसने एक जनवरी को अपनी मां को इस बारे में बताया।

एफआईआर में खिलाड़ी ने उल्लेख किया है कि भारद्वाज उसे प्रशिक्षण के लिए मोहाली, पटियाला, देहरादून और दिल्ली जैसे विभिन्न स्थानों पर बुलाते थे, लेकिन वह हर बार उसी दिन घर लौट आती थी। घटना वाले दिन वह राष्ट्रीय चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए टैक्सी से अकेले करणी सिंह रेंज गई थी।

खिलाड़ी के अनुसार, प्रतियोगिता समाप्त होने के बाद जब वह घर लौटने वाली थी, तब कोच ने उसके प्रदर्शन का विश्लेषण करने के बहाने उसे रुकने को कहा। इसके बाद कोच ने उसे फरीदाबाद के सूरजकुंड इलाके के एक होटल की लॉबी में मिलने के लिए बुलाया। वहां पहुंचने पर कथित तौर पर उसे कोच के कमरे में आने के लिए मजबूर किया गया और कहा गया कि उसके प्रदर्शन पर गहन चर्चा जरूरी है।

पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि कोच ने पहले उसे लिफ्ट एरिया में आने को कहा और फिर बताया कि उन्होंने वहां एक कमरा बुक किया है। इसके बाद वह उसे तीसरी मंजिल पर स्थित कमरे में ले गए। वहां मैच को लेकर बातचीत हुई, लेकिन कुछ देर बाद जब खिलाड़ी ने घर जाने की इच्छा जताई, तो कोच ने उसे फिजियोथेरेपी तकनीक के नाम पर उसकी “पीठ की हड्डी चटकाने” की बात कही।

एफआईआर के अनुसार, खिलाड़ी ने तुरंत इनकार किया, इसके बावजूद कोच ने कथित तौर पर उसे जबरदस्ती पेट के बल लिटाया और यौन उत्पीड़न किया। विरोध करने पर उसे धमकी दी गई कि यदि उसने किसी को यह बात बताई तो उसका पेशेवर करियर बर्बाद कर दिया जाएगा। इस डर के कारण उसने लंबे समय तक किसी को घटना की जानकारी नहीं दी।

बाद में उसके व्यवहार में आए बदलाव को देखकर जब उसकी मां ने लगातार पूछताछ की, तब उसने पूरी घटना साझा की। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने पुष्टि की है कि मामले की जांच जारी है।

गौरतलब है कि पूर्व पिस्टल निशानेबाज अंकुश भारद्वाज पहले भी विवादों में रहे हैं। वर्ष 2010 में उन्हें बीटा-ब्लॉकर के उपयोग के कारण डोपिंग प्रतिबंध का सामना करना पड़ा था। निशानेबाजी, तीरंदाजी और बिलियर्ड्स जैसे खेलों में बीटा-ब्लॉकर प्रतिबंधित होते हैं क्योंकि ये हृदय गति, मांसपेशियों के कंपन और चिंता को कम करने में मदद करते हैं।

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