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समुद्र मंथन’ मेगा-प्रोजेक्ट: ₹84,084 करोड़ की अपतटीय तेल व गैस अन्वेषण योजना के लिए जारी हुए वैश्विक टेंडर

इंडियन व्यू टीम/ नई दिल्ली: भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सबसे बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ‘समुद्र मंथन’ (Samudra Manthan) नामक महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना के लिए आधिकारिक रूप से वैश्विक टेंडर्स (Global Tenders) का ड्राफ्ट जारी कर दिया है। 31 जुलाई 2026 को केंद्रीय कैबिनेट द्वारा अनुमोदित इस योजना का लक्ष्य भारत के गहरे समुद्री क्षेत्रों में तेल और गैस के विशाल भंडारों की खोज करना है।

इस मेगा-प्रोजेक्ट के पहले चरण (वित्तीय वर्ष 2030-31 तक) के लिए ₹84,084 करोड़ का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया है। वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का लगभग 88.7 प्रतिशत कच्चा तेल (Crude Oil) और आधा प्राकृतिक गैस विदेशों से आयात करता है, जिससे अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ पड़ता है। ‘समुद्र मंथन’ योजना के तहत 60 से अधिक ‘डीपवाटर’ और ‘अल्ट्रा-डीपवाटर’ कुओं की खुदाई की जाएगी और बड़े पैमाने पर 2D तथा 3D भूकंपीय सर्वेक्षण (Seismic Surveys) किए जाएंगे। इस मिशन से भारत के हाइड्रोकार्बन भंडार में 600 मिलियन मीट्रिक टन तेल समकक्ष (MMTOE) जुड़ने की उम्मीद है।

इस योजना की सबसे खास बात यह है कि सरकार अब केवल ब्लॉक नीलाम नहीं कर रही है, बल्कि कंपनियों के साथ वित्तीय जोखिम (Financial Risk) भी साझा कर रही है। गहरे पानी में एक कुएं की खुदाई में सैकड़ों करोड़ खर्च होते हैं, इसलिए सरकार अन्वेषण लागत का 50 प्रतिशत (अधिकतम ₹675 करोड़ प्रति कुआं) खुद वहन करेगी। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ के तहत देश के अपतटीय ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र (Offshore Energy Ecosystem) को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का एक अभूतपूर्व प्रयास है।

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