संसद में पास हुआ एंटी-पेपर लीक बिल 2026
परीक्षाओं में धोखाधड़ी रोकने के लिए कड़े प्रावधान, विपक्ष का वॉकआउट

अभिषेक सिंह/ नई दिल्ली: देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता सुनिश्चित करने के लिए राज्यसभा ने ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) संशोधन विधेयक 2026’ को हंगामे के बीच पारित कर दिया है। इससे पहले यह बिल लोकसभा से भी पास हो चुका है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सदन में यह बिल पेश करते हुए कहा कि यह कानून छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने और शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए जरूरी है।
इस नए और कड़े कानून के तहत, पेपर लीक या परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले व्यक्तियों के लिए न्यूनतम सजा को तीन साल से बढ़ाकर पांच साल कर दिया गया है। वहीं जुर्माने की अधिकतम राशि को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया गया है। यदि कोई संगठित गिरोह इस अपराध में शामिल पाया जाता है, तो दोषियों को 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। परीक्षा आयोजित कराने वाली सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों की संलिप्तता पाए जाने पर जुर्माना राशि 5 करोड़ रुपये तक होगी और उन्हें 8 साल के लिए डिबार (ब्लैकलिस्ट) किया जा सकता है।
कानून में जांच और ट्रायल के लिए भी समय सीमा तय की गई है। मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी और चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर स्पेशल फास्ट-ट्रैक अदालतों (Special Fast Track Courts) में ट्रायल पूरा करना अनिवार्य होगा। हालांकि, चर्चा के दौरान राज्यसभा में भारी हंगामा हुआ और विपक्ष ने गृह मंत्री अमित शाह से जवाब की मांग करते हुए सदन से वॉकआउट किया।



