परीक्षा प्रणाली को लेकर भाजपा विधायक की कांग्रेस को चुनौती
'केंद्र जैसा सख्त एंटी-पेपर लीक कानून लागू करे राज्य सरकार'

इंडियन व्यू टीम/ नई दिल्ली: देश भर की प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रही धांधली और पेपर लीक के मामलों पर जारी राष्ट्रीय बहस के बीच अब राज्यों की राजनीति भी गरमा गई है। केंद्र सरकार द्वारा संसद में कड़ा ‘एंटी-पेपर लीक कानून’ (Anti-Paper Leak Law) पास किए जाने के बाद, राज्यों में भी इसी तरह के सख्त कदम उठाने की मांग उठने लगी है। इसी कड़ी में एक वरिष्ठ भाजपा विधायक ने अपनी कांग्रेस शासित राज्य सरकार को खुली चुनौती देते हुए कहा है कि यदि वे वास्तव में छात्रों के भविष्य को लेकर गंभीर हैं, तो उन्हें केंद्र सरकार की तर्ज पर अपने राज्य में भी एक सख्त कानून लागू करना चाहिए।
भाजपा विधायक ने राज्य विधानसभा परिसर के बाहर मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि कांग्रेस शासित राज्यों में युवाओं के भविष्य के साथ लगातार खिलवाड़ हो रहा है और राज्य लोक सेवा आयोगों की कार्यप्रणाली भ्रष्टाचार के दलदल में डूब चुकी है। उन्होंने चुनौती दी कि राज्य सरकार को तुरंत एक अध्यादेश या नया बिल लाना चाहिए जिसमें पेपर लीक के दोषियों की संपत्ति कुर्क करने, 10 साल की जेल और करोड़ों रुपये के जुर्माने का प्रावधान हो, जैसा कि केंद्र सरकार ने किया है।
इस चुनौती ने कांग्रेस सरकार को बचाव की मुद्रा में ला दिया है। राज्य सरकार के प्रवक्ताओं ने पलटवार करते हुए कहा है कि पेपर लीक एक राष्ट्रीय समस्या है, जो भाजपा शासित राज्यों में भी उतनी ही गंभीर है। उन्होंने याद दिलाया कि केंद्र सरकार की खुद की एजेंसियां (जैसे NTA) भी हाल ही में अपनी विश्वसनीयता साबित करने में विफल रही हैं। हालांकि, इस राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच राज्य के युवा और छात्र संगठन इस बात पर एकमत हैं कि अब समय आ गया है जब राजनीतिक पार्टियां राजनीति से ऊपर उठकर एक फूलप्रूफ और पारदर्शी परीक्षा तंत्र का निर्माण करें।



