कावेरी जल विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट: तमिलनाडु को पानी दिलाने के लिए डीएमके ने दायर की याचिका

राघवेन्द्र प्रताप सिंह/ नई दिल्ली / चेन्नई: कावेरी नदी के जल बंटवारे को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच विवाद एक बार फिर गहरा गया है। तमिलनाडु को कावेरी के पानी का उसका उचित हिस्सा दिलाने के लिए राज्य की सत्ताधारी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। डीएमके के किसान विंग ने सर्वोच्च अदालत में एक याचिका दायर कर कर्नाटक सरकार को तुरंत पानी छोड़ने का निर्देश देने की मांग की है।
डीएमके ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि वह कर्नाटक को कावेरी जल नियमन समिति (CWRC) के 28 जुलाई के निर्देश को लागू करने का आदेश दे। इस निर्देश के तहत कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए बिलिगुंडलू (Biligundlu) पॉइंट पर प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ना है। इसके अतिरिक्त, डीएमके ने यह भी मांग की है कि 26 जुलाई तक का लगभग 9.46 टीएमसी (TMC) का जो बैकलॉग बकाया है, उसे भी कर्नाटक तुरंत पूरा करे।
तमिलनाडु सरकार और डीएमके का तर्क है कि कावेरी डेल्टा क्षेत्र में यह समय ‘कुरुवई’ (Kuruvai) धान की फसल के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यदि अभी पानी नहीं मिला, तो खड़ी फसलें बर्बाद हो जाएंगी और आने वाली ‘सांबा’ (Samba) फसल की तैयारी भी खटाई में पड़ जाएगी। पार्टी के अध्यक्ष और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने भी कर्नाटक के रवैये की कड़ी आलोचना की है। लाखों किसानों की आजीविका को बचाने के लिए अब पूरी उम्मीदें सुप्रीम कोर्ट के आगामी फैसले पर टिकी हैं।



