सुप्रीम कोर्ट का मानवीय फैसला: गंभीर मेडिकल ग्राउंड पर आईआईटी खड़गपुर के छात्र का आईआईटी रुड़की में ट्रांसफर मंजूर

पल्लवी श्रीवास्तव/ नई दिल्ली: भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में छात्रों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए एक बेहद संवेदनशील और दुर्लभ फैसला सुनाया है। अदालत ने आईआईटी खड़गपुर (IIT Kharagpur) में बी.आर्क (B.Arch) के एक छात्र को उसके गंभीर मेडिकल ग्राउंड और निरंतर उपचार की आवश्यकता को देखते हुए आईआईटी रुड़की (IIT Roorkee) में स्थानांतरित (Transfer) करने की विशेष अनुमति प्रदान कर दी है।
छात्र की ओर से पेश वकीलों ने मेडिकल रिपोर्ट सौंपते हुए बताया कि छात्र एक गंभीर डिप्रेशन विकार (Recurrent Depressive Disorder) से पीड़ित है और चंडीगढ़ स्थित पीजीआई (PGI Chandigarh) से उसका नियमित उपचार चल रहा है। खड़गपुर की दूरी के कारण उसका इलाज और पढ़ाई दोनों प्रभावित हो रहे थे। हालांकि आईआईटी संस्थानों में एक आईआईटी से दूसरे आईआईटी में ट्रांसफर का कोई सामान्य नियम या प्रावधान नहीं है, क्योंकि हर आईआईटी अपनी सीनेट के तहत स्वतंत्र रूप से काम करती है।
संस्थान के नियमों की इस बाधा को देखते हुए, जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने भारतीय संविधान के ‘अनुच्छेद 142’ (Article 142) के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल किया, जो अदालत को “पूर्ण न्याय” (Complete Justice) करने का अधिकार देता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश छात्र की विशेष मेडिकल स्थिति (Peculiar Medical Circumstances) को देखते हुए दिया गया है और यह भविष्य के लिए एक सामान्य नियम नहीं बनेगा। अदालत ने आईआईटी रुड़की को निर्देश दिया है कि वे छात्र को अपने बी.आर्क प्रोग्राम के प्रथम वर्ष में प्रवेश दें। शिक्षाविदों ने शीर्ष अदालत के इस मानवीय रुख की काफी सराहना की है।



