‘चयनात्मक सक्रियता’ के आरोपों के बीच बैकफुट पर केरल के सितारे, अब शिक्षक रैंक-होल्डर्स के विरोध प्रदर्शन को दिया खुला समर्थन

राघवेंद्र प्रताप सिंह/ तिरुवनंतपुरम: केरल के सामाजिक और राजनीतिक हलकों में इन दिनों ‘चयनात्मक सक्रियता’ (Selective Activism) का मुद्दा गरमाया हुआ है। राष्ट्रीय मुद्दों (जैसे दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए हालिया प्रदर्शनों) पर मुखर रहने वाले केरल के कई मशहूर हस्तियों, लेखकों और अभिनेताओं को तब भारी आलोचना का शिकार होना पड़ा, जब उन्होंने अपने ही राज्य में रोज़गार के लिए संघर्ष कर रहे युवाओं के मुद्दे पर चुप्पी साध ली। इसी चौतरफा दबाव और आलोचना (Flak) के बाद, अब केरल के कई जाने-माने चेहरों ने लोक सेवा आयोग (PSC) के ‘शिक्षक रैंक-होल्डर्स’ के लंबे समय से चल रहे विरोध प्रदर्शन को अपना खुला समर्थन दे दिया है।
केरल में सरकारी स्कूलों में नियुक्ति की राह देख रहे PSC पास युवा (रैंक-होल्डर्स) पिछले कई हफ्तों से सचिवालय के बाहर धरने पर बैठे हैं। उनका आरोप है कि रैंक सूची की समय-सीमा समाप्त होने वाली है, लेकिन सरकार रिक्त पदों पर नियुक्तियां नहीं कर रही है। जब जंतर-मंतर के मुद्दे पर ट्वीट करने वाले सितारों ने इन बेरोजगार शिक्षकों की सुध नहीं ली, तो सोशल मीडिया पर ‘दोगलेपन’ के आरोप लगने लगे।
आलोचनाओं से घिरने के बाद, अब राज्य के कई फिल्म निर्देशकों, कलाकारों और सांस्कृतिक चेहरों ने प्रदर्शन स्थल का दौरा किया है और राज्य सरकार से युवाओं की मांगों को तुरंत मानने की अपील की है। उनका कहना है कि युवाओं का भविष्य अधर में लटकाना राज्य की शिक्षा प्रणाली के लिए हानिकारक है। इस नए राजनीतिक दबाव के बाद केरल सरकार हरकत में आई है और शिक्षा मंत्री ने प्रदर्शनकारी शिक्षकों के प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए बुलाया है। यह पूरा घटनाक्रम स्पष्ट रूप से दिखाता है कि आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया का दबाव किस तरह सार्वजनिक हस्तियों को स्थानीय ज़मीनी मुद्दों से जुड़ने के लिए मजबूर कर सकता है।



