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लोक परीक्षा में नकल और पेपर लीक पर होगी सख्ती, संशोधन विधेयक 2026 लोकसभा में पेश

नई दिल्ली ( राघवेंद्र प्रताप सिंह) : केंद्र सरकार ने लोक परीक्षाओं में प्रश्न-पत्र लीक, संगठित नकल और अन्य अनुचित साधनों पर और कड़ी कार्रवाई का रास्ता साफ करते हुए लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 लोकसभा में पेश किया। केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन में विधेयक पेश करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य त्वरित जांच, फास्ट ट्रैक अदालतों के जरिए जल्द सुनवाई और कड़े दंडात्मक प्रावधानों के माध्यम से परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को और मजबूत करना है।

त्वरित जांच और फास्ट ट्रैक अदालतों का प्रावधान

संशोधन विधेयक में परीक्षा से जुड़े मामलों की जांच दो माह के भीतर पूरी करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, इन मामलों की सुनवाई के लिए सत्र न्यायालयों को विशेष फास्ट ट्रैक अदालत के रूप में नामित किया जाएगा। आरोप पत्र दाखिल होने के बाद तीन माह के भीतर सुनवाई पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रत्येक विशेष अदालत के लिए विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति का भी प्रावधान किया गया है।

नकल और पेपर लीक पर बढ़ेगी सजा

विधेयक के अनुसार, परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों के लिए न्यूनतम सजा तीन वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष और अधिकतम सजा पांच वर्ष से बढ़ाकर दस वर्ष करने का प्रस्ताव है। इसी तरह अधिकतम जुर्माना 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 50 लाख रुपए किया जाएगा।

सेवा प्रदाताओं पर भी होगी कड़ी कार्रवाई

यदि किसी परीक्षा आयोजन से जुड़े सेवा प्रदाता की संलिप्तता सामने आती है तो उसके लिए अधिकतम जुर्माना 1 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव है। साथ ही, ऐसे सेवा प्रदाताओं को लोक परीक्षाएं आयोजित करने से प्रतिबंधित करने की अवधि चार वर्ष से बढ़ाकर आठ वर्ष की जाएगी।

प्रबंधकीय अधिकारियों के लिए भी सख्त दंड

संशोधन विधेयक में सेवा प्रदाता संस्थाओं के प्रबंधकीय अधिकारियों के लिए भी न्यूनतम पांच वर्ष और अधिकतम दस वर्ष तक की जेल का प्रावधान किया गया है। इनके लिए अधिकतम जुर्माना भी 1 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव है।

संगठित अपराधों पर और कड़ी सजा

परीक्षा से जुड़े संगठित अपराधों के मामलों में न्यूनतम सजा पांच वर्ष से बढ़ाकर सात वर्ष और अधिकतम सजा दस वर्ष तक रखने का प्रस्ताव है। ऐसे मामलों में अधिकतम जुर्माना 1 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपए किया जाएगा।

विशेष कार्यबल करेगा जांच

विधेयक में केंद्र सरकार को यह अधिकार देने का प्रस्ताव है कि वह इस अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की जांच विशेष रूप से गठित विशेष कार्यबल (स्पेशल टास्क फोर्स) को सौंप सके।

अपील के समयबद्ध निपटान का प्रावधान

नई धारा 12ख के तहत विशेष फास्ट ट्रैक अदालत के फैसले के खिलाफ 30 दिनों के भीतर उच्च न्यायालय में अपील की जा सकेगी। साथ ही, जहां संभव हो, अपील का निपटान तीन माह के भीतर करने का प्रयास किया जाएगा।

2024 के कानून को और मजबूत बनाने की पहल

सरकार ने कहा कि लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024, जो 21 जून 2024 से लागू है, पहले ही यूपीएससी, एसएससी, आरआरबी, आईबीपीएस, एनटीए और केंद्र सरकार की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के लिए व्यापक कानूनी ढांचा उपलब्ध कराता है। संशोधन विधेयक का उद्देश्य इस कानून को और प्रभावी बनाते हुए प्रश्न-पत्र लीक, फर्जी अभ्यर्थी, संगठित नकल और परीक्षा संबंधी अन्य गड़बड़ियों पर कठोर अंकुश लगाना है।

सरकार का कहना है कि प्रस्तावित संशोधनों से लोक परीक्षाओं की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता मजबूत होगी। साथ ही, योग्य एवं मेधावी अभ्यर्थियों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी और भर्ती परीक्षाओं में जनता का भरोसा और सुदृढ़ होगा।

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