केरल में मूसलाधार बारिश का कहर जारी: मौसम विभाग ने वायनाड और इडुक्की में जारी किया ‘रेड अलर्ट’, भूस्खलन की गंभीर चेतावनी

पल्लवी श्रीवास्तव/ तिरुवनंतपुरम: दक्षिण भारत, विशेषकर केरल राज्य, इन दिनों दक्षिण-पश्चिम मानसून के आक्रामक रूप की मार झेल रहा है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने राज्य के कई हिस्सों में जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। इसी बीच, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पहाड़ी जिलों वायनाड और इडुक्की सहित कई हिस्सों के लिए ‘रेड अलर्ट’ और ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है। भारी बारिश के कारण सबसे बड़ा खतरा भूस्खलन (Landslide) का पैदा हो गया है, जिसे लेकर राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) ने बेहद गंभीर चेतावनी जारी की है।
वायनाड जिला, जो अपनी भौगोलिक संरचना के कारण भूस्खलन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील माना जाता है, वहां पिछले 48 घंटों से लगातार बारिश हो रही है। बारिश के कारण पहाड़ों की मिट्टी ढीली पड़ गई है, जिससे चट्टानों के खिसकने और मलबे के बस्तियों की ओर बहकर आने का खतरा कई गुना बढ़ गया है। इतिहास गवाह है कि 2018 और 2019 की विनाशकारी बाढ़ के दौरान भी वायनाड में भयानक भूस्खलन हुए थे, जिसमें भारी जान-माल का नुकसान हुआ था। इसी के मद्देनजर, प्रशासन इस बार कोई कोताही नहीं बरतना चाहता।
राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन ने युद्ध स्तर पर बचाव और एहतियाती उपाय शुरू कर दिए हैं। पहाड़ी ढलानों, खदान क्षेत्रों और नदियों के किनारे रहने वाले संवेदनशील इलाकों के निवासियों को सुरक्षित राहत शिविरों में ले जाया जा रहा है। नदियों, विशेषकर पेरियार और भरतपुझा का जलस्तर खतरे के निशान के बेहद करीब पहुँच गया है, जिसके कारण बांधों के गेट खोलने पड़ सकते हैं। इससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा और बढ़ जाएगा।
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की कई टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और उन्हें प्रभावित जिलों में तैनात कर दिया गया है। इसके अलावा, पुलिस, दमकल विभाग और राजस्व अधिकारियों को 24 घंटे नियंत्रण कक्ष में मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य सरकार ने पर्यटकों के लिए सख्त एडवाइजरी जारी की है, जिसमें उन्हें फिलहाल वायनाड, मुन्नार और अन्य पहाड़ी पर्यटन स्थलों की यात्रा से बचने की हिदायत दी गई है। किसानों को भी अपनी फसलों और पशुधन की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है, क्योंकि भारी बारिश से कृषि क्षेत्र को भी भारी नुकसान पहुंचने की आशंका है।



