चंड़ीगढ़ में ब्रिक्स देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों की तीन दिवसीय बैठक आज से

नई दिल्ली ( राघवेंद्र प्रताप सिंह) : भारत की मेजबानी में ब्रिक्स देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक आज चंड़ीगढ़ में शुरू हो रही है। तीन दिन की इस बैठक में मुख्य रूप से स्वास्थ्य सुरक्षा, डिजिटल स्वास्थ्य, महामारी से निपटने की तैयारी और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा तक सब की पहुंच पर विचार-विमर्श होगा।
केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने मीडिया को बताया कि यह बैठक स्वास्थ्य संबंधी प्रमुख वैश्विक प्राथमिकताओं पर सामूहिक कार्रवाई की भारत की प्रतिबद्धता दर्शाती है। उन्होंने कहा कि मंत्रिस्तरीय बैठक में पारंपरिक और पूरक औषधि, स्वस्थ जीवन शैली, मानसिक आरोग्य और सक्षम स्वास्थ्य प्रणाली पर भी विचार होगा।
आधिकारिक कार्यक्रम की शुरूआत आज वरिष्ठ अधिकारियों के बैठक से होगी। इसके बाद कल स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जे. पी. नड्डा की अध्यक्षता में ब्रिक्स देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक होगी। शुक्रवार को भारत “ब्रिक्स संवाद: डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सक्षम स्वास्थ्य सेवा तक” शीर्षक से उच्चस्तरीय कार्यक्रम की मेजबानी करेगा।
ब्रिक्स देश उभरती हुई बाजार अर्थव्यवस्थाओं के नाम से जाने जाते हैं । ब्रिक्स शब्द के गठनकर्ता जिम ओ नील जो कि गोल्डमैन सैश नामक अंतर्राष्ट्रीय कंसल्टेंसी फर्म के मुख्य अर्थशास्त्री थे , ने 2001 में ब्रिक शब्द को गढ़ते हुए कहा था कि ब्राजील, रूस , भारत और चीन ऐसी उभरती हुई बाजार अर्थव्यवस्थाएं हैं जो अपनी जीडीपी विकास दर , प्रतिव्यक्ति आय , जनसंख्या आधार , विनिर्माण और सेवा क्षेत्र आदि के बल पर 2050 तक विकसित देशों की अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ देंगे । 2050 आने में तो देर है, लेकिन नील का यह सपना 15 साल में ही पूरा होता दिख गया । आज चीन एशिया की सबसे बड़ी और विश्व में अमेरिका के बाद दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है । साथ ही दुनिया के सबसे बड़े निर्यातक देशों में शामिल है।
ब्रिक्स की महत्ता यह है कि दुनिया की 42 प्रतिशत आबादी ब्रिक्स देशों में निवास करती है। वैश्विक जीडीपी में इसका शेयर 23 प्रतिशत है और वैश्विक व्यापार में इसकी 17 प्रतिशत हिस्सेदारी है । ब्रिक्स देशों का संयुक्त सकल घरेलू उत्पाद 26 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का है । ब्रिक्स का एक बड़ा महत्व उसके न्यू डेवलपमेंट बैंक और उसके द्वारा वित्त पोषित परियोजनाओं से पता चलता है । 100 बिलियन डॉलर वाले इस बैंक से ब्रिक्स देशों में अवसंरचनात्मक परियोजनाओं और नवीकरणीय ऊर्जा के विकास के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है । इस बैंक ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस से भी समझौता भी किया है। ब्रिक्स के ही बैनर तले 100 बिलियन डॉलर वाले कंटिंजेन्ट रिजर्व अरेंजमेंट के जरिए ब्रिक्स देशों में किसी भी भुगतान संतुलन संकट , तरलता संकट यानि मुद्रास्फीति और अवस्फीति जैसी समस्याओं से निपटने के लिए वित्तीय मदद देने का इंतजाम किया गया है।



