Trending

सरकार के प्रस्ताव का किया कड़ा विरोध

अभिषेक सिंह/ नई दिल्ली / पटना: बिहार सरकार द्वारा राज्य की उच्च शिक्षा प्रणाली में किए जा रहे कथित प्रशासनिक बदलावों ने अब एक राष्ट्रीय विवाद का रूप ले लिया है। दिल्ली यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (DUTA) और फेडरेशन ऑफ सेंट्रल यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (FEDCUTA) ने बिहार सरकार के उस प्रस्तावित शिक्षा बिल का कड़ा विरोध किया है, जिसके तहत राज्य के 500 से अधिक अंडरग्रेजुएट (स्नातक) कॉलेजों को विश्वविद्यालयों के अधिकार क्षेत्र से हटाकर सीधे शिक्षा विभाग (सरकार) के नियंत्रण में लाने की तैयारी चल रही है।

स्वायत्तता (Autonomy) पर सीधा प्रहार

डूटा (DUTA) के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने बिहार के राज्यपाल और कुलाधिपति (Chancellor) को एक विस्तृत संयुक्त ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि विश्वविद्यालयों से उनके कॉलेजों को छीनकर एक सरकारी ‘निदेशालय’ या विभाग के अधीन करना, उच्च शिक्षा संस्थानों की ‘अकादमिक स्वायत्तता’ पर सीधा प्रहार है। शिक्षकों का तर्क है कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री बांटने वाले केंद्र नहीं हैं, बल्कि वे एक पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) हैं जहां सिलेबस निर्माण, शोध और संकाय विकास (Faculty Development) एक साथ जुड़े होते हैं। सरकार का यह कदम इस पूरे तंत्र को ‘नौकरशाही’ (Bureaucracy) के अधीन कर देगा।

एनईपी (NEP) 2020 का दिया हवाला

विरोध कर रहे शिक्षाविदों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का भी हवाला दिया है। एनईपी 2020 स्पष्ट रूप से उच्च शिक्षण संस्थानों को अधिक प्रशासनिक और अकादमिक स्वायत्तता देने की वकालत करती है, न कि उन्हें सरकारी नियंत्रण में बांधने की। शिक्षकों को यह भी डर है कि कॉलेजों के सीधे सरकारी नियंत्रण में आने से शिक्षकों के तबादले, नियुक्तियों और फंड आवंटन में राजनीतिक हस्तक्षेप (Political Interference) बढ़ जाएगा, जिससे पढ़ाई की गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ेगा।

छात्र संगठनों ने भी खोला मोर्चा

केवल दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक ही नहीं, बल्कि पटना विश्वविद्यालय (Patna University) के शिक्षकों, छात्रों और पूर्व छात्रों ने भी इस प्रस्ताव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनका मानना है कि पटना विश्वविद्यालय जैसे ऐतिहासिक संस्थानों का गौरव उनके अंगीभूत (Constituent) कॉलेजों से ही है। सरकार के इस कदम से शिक्षाविदों में भारी रोष है और उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि मानसून सत्र में इस बिल को वापस नहीं लिया गया, तो देश भर के शिक्षक संगठन बिहार में एक बड़ा आंदोलन खड़ा करेंगे।

Related Articles

Back to top button