मॉनसून सत्र के पहले दिन लोकसभा में भारी हंगामा, विपक्षी सांसदों ने राष्ट्रपति भवन तक पैदल मार्च निकालने का किया ऐलान

राघवेंद्र प्रताप सिंह/ नई दिल्ली: संसद के मॉनसून सत्र 2026 के पहले ही दिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा टकराव देखने को मिला। लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी गठबंधन (INDIA Bloc) के सांसदों ने देश के विभिन्न मुद्दों को लेकर जोरदार नारेबाजी और हंगामा शुरू कर दिया। विपक्ष के कड़े तेवरों के कारण निचले सदन में एक घंटे भी कामकाज नहीं हो सका और अध्यक्ष को कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी। हंगामे के बीच विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए संसद भवन से राष्ट्रपति भवन तक विरोध मार्च निकालने की घोषणा की है।
किन मुद्दों पर हुआ हंगामा?
जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसद हाथों में तख्तियां लेकर वेल (Well) में आ गए। विपक्ष की सबसे प्रमुख मांग नीट-यूजी पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और राम मंदिर निर्माण के चंदे में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं पर संसद में तुरंत चर्चा कराने की थी। इसके अलावा, मणिपुर में जारी सुरक्षा स्थिति और देश में बढ़ती खुदरा महंगाई दरों को लेकर भी विपक्षी सदस्यों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
अध्यक्ष की अपील का नहीं हुआ असर
लोकसभा अध्यक्ष ने बार-बार विपक्षी सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने और प्रश्नकाल (Question Hour) को चलने देने की अपील की। अध्यक्ष ने कहा, “जनता ने आपको देश के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए चुनकर भेजा है, हंगामे के लिए नहीं। सरकार हर विषय पर जवाब देने के लिए तैयार है।” हालांकि, विपक्षी दल नियम 267 के तहत सभी कामकाज रोककर तुरंत बहस कराने की अपनी मांग पर अड़े रहे।
राष्ट्रपति भवन तक पैदल मार्च का ऐलान
सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित होने के बाद कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और सपा समेत तमाम विपक्षी दलों के शीर्ष नेताओं ने संसद भवन परिसर में एक आपात बैठक की। बैठक के बाद विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार संसद के भीतर जनप्रतिनिधियों की आवाज दबा रही है। इसके विरोध में मंगलवार को विपक्षी सांसद संसद भवन से राष्ट्रपति भवन तक पैदल मार्च निकालेंगे और राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपकर हस्तक्षेप की मांग करेंगे। विपक्ष के इस आक्रामक रुख से साफ है कि यह सत्र विधायी कामकाज से ज्यादा राजनीतिक घमासान का केंद्र बनने जा रहा है।



