भूपेंद्र यादव ने कोयंबटूर में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की 29वीं बैठक की अध्यक्षता की

नई दिल्ली (अभिषेक सिंह) : राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की 29वीं बैठक 9 जुलाई केंद्रीय राज्य वन सेवा अकादमी (सीएएसएफओएस), कोयंबटूर, तमिलनाडु में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री और एनटीसीए के अध्यक्ष श्री भूपेन्द्र यादव ने की। बैठक में संसद सदस्यों, श्री राजीव प्रताप रूडी और श्री हरीश चंद्र मीना, प्राधिकरण के अन्य सदस्यों के अलावा, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, बाघ वाले राज्यों के मुख्य वन्यजीव वार्डन और बाघ अभयारण्यों के क्षेत्र निदेशक शामिल हुए।
इस बैठक में देश में बाघों के संरक्षण और वन्यजीव प्रबंधन से जुड़े अहम नीतिगत, प्रबंधन और संस्थागत मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। यह चर्चा मुख्य रूप से भारत के बाघ क्षेत्रों में सुरक्षा को मजबूत करने, प्रबंधन के तौर-तरीकों में सुधार लाने और संरक्षण के परिणामों को बेहतर बनाने पर केंद्रित रही। प्राधिकरण ने पिछली बैठक में लिए गए निर्णयों के कार्यान्वयन की समीक्षा की और बाघों तथा उनके आवासों के संरक्षण को और मजबूत करने के उद्देश्य से लाए गए प्रस्तावों पर विचार किया।
बैठक के दौरान, मंत्री महोदय ने दो महत्वपूर्ण एनटीसीए प्रकाशन जारी किए
रोडमैप टू रेस्क्यू: बाघ परिदृश्यों में जंगली जानवरों के बचाव-पुनर्वास-मुक्ति के लिए अस्थायी/पारगमन सुविधाओं की स्थापना के लिए रणनीतिक रोडमैप: यह भारत के बाघ परिदृश्यों में वन्यजीवों के बचाव, पुनर्वास और उन्हें सुरक्षित रूप से छोड़े जाने की प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए एक वैज्ञानिक और रणनीतिक फ्रेमवर्क है। यह रोडमैप उभरती हुई संरक्षण चुनौतियों और मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने की तैयारियों को बेहतर बनाएगा; और,
स्ट्राइड्स’ 2026: स्टेटस ऑफ टाइगर रिजर्व्स–इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, इकोलॉजी एंड सोशल पैरामीटर्स: यह भारत के बाघ अभयारण्यों में किए गए संरक्षण और प्रबंधन के प्रयासों का एक व्यापक मूल्यांकन है। यह रिपोर्ट बाघ संरक्षण को मजबूत करने के लिए साक्ष्य-आधारित योजना, अनुकूलनीय प्रबंधन और सोच-समझकर निर्णय लेने की प्रक्रिया में मदद करेगी।
प्राधिकरण ने वर्ष 2024-25 के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के वार्षिक रिपोर्ट पर विचार किया और उसे मंजूरी दी, साथ ही एनटीसीए की 28वीं बैठक के निर्णयों पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट की समीक्षा की। बैठक में प्राधिकरण की तकनीकी समिति और प्रशासनिक समिति की सिफारिशों पर भी विचार किया गया।
बैठक में ‘बाघ सम्मेलन’ को एक राष्ट्रीय मंच के तौर पर आयोजित करने के प्रस्तावों पर भी विचार किया गया। इस सम्मेलन का उद्देश्य कॉर्पोरेट संस्थाओं, परोपकारी संगठनों और अन्य हितधारकों के साथ साझेदारी को बढ़ावा देकर ‘टाइगर कंजर्वेशन फाउंडेशन’ के माध्यम से बाघ अभयारण्यों के लिए वित्तीय संसाधन जुटाना है।
इसके अतिरिक्त, प्राधिकरण ने ‘स्ट्राइप्स’ – (सिम्पोजियम ऑन टाइगर रिसर्च, इनोवेशन, पॉलिसी, इकोलॉजी एंड सस्टेनेबिलिटी) के आयोजन पर भी विचार-विमर्श किया।



