प्रतियोगी परीक्षाओं में सॉल्वर गैंग का खेल होगा खत्म: NTA का बड़ा एक्शन, केंद्रों पर ‘रियल-टाइम डिजिटल लॉकर’ और जैमर लगाने का नया टेंडर जारी

इंडियन व्यू टीम/ नई दिल्ली: देश में हाल के महीनों में विभिन्न राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे NEET, NET और CUET) में पेपर लीक, सॉल्वर गैंग की सक्रियता और तकनीकी सेंधमारी की घटनाओं ने हड़कंप मचा रखा था। इन गंभीर सुरक्षा चूकों से सबक लेते हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने अब तक का सबसे बड़ा और क्रांतिकारी कदम उठाया है। आगामी परीक्षाओं को पूरी तरह से फुल-प्रूफ, पारदर्शी और नकल विहीन बनाने के लिए एनटीए ने परीक्षा केंद्रों पर अत्याधुनिक ‘रियल-टाइम डिजिटल लॉकर’ (Real-Time Digital Lockers) और हाई-फ्रीक्वेंसी जैमर (Jammers) लगाने का एक नया और विशाल वैश्विक टेंडर (Global Tender) जारी कर दिया है।
क्या है ‘रियल-टाइम डिजिटल लॉकर’ और यह कैसे काम करेगा?
अबतक परीक्षाओं में सबसे बड़ी कमजोरी प्रश्नपत्रों के वितरण और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने के दौरान उनके लीक होने की रहती थी। इस खामी को दूर करने के लिए एनटीए ‘रियल-टाइम डिजिटल लॉकर’ तकनीक ला रहा है।
* इस नई व्यवस्था के तहत, डिजिटल प्रश्नपत्रों को एक विशेष इलेक्ट्रॉनिक तिजोरी (Locker) में रखा जाएगा जो सीधे एनटीए के केंद्रीय कमांड सेंटर से नियंत्रित होगी।
* यह लॉकर किसी भी मैन्युअल चाबी या स्थानीय पासवर्ड से नहीं खुलेगा। परीक्षा शुरू होने से ठीक 15-30 मिनट पहले एनटीए मुख्यालय से एक ‘डायनेमिक रियल-टाइम ओटीपी’ (OTP) और बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन जारी किया जाएगा, जिसके बाद ही यह लॉकर खुलेगा और प्रश्नपत्रों को प्रिंट या स्क्रीन पर लाइव किया जा सकेगा।
* यदि कोई इस लॉकर के साथ जबरन छेड़छाड़ (Tampering) करने की कोशिश करेगा, तो केंद्रीय सर्वर पर तुरंत अलार्म बज जाएगा और वह लॉकर स्वतः ही डेटा को डिलीट कर देगा।
हाई-फ्रीक्वेंसी जैमर्स से कटेगा ब्लूटूथ का जाल
सॉल्वर गैंग द्वारा परीक्षा केंद्रों के भीतर छिपे हुए ब्लूटूथ डिवाइस, कलाई घड़ियों और माइक्रो-ईयरफोन के जरिए बाहर बैठे कॉपियों को हल कराने की तकनीक अब पूरी तरह बेकार साबित होने वाली है। एनटीए द्वारा जारी नए टेंडर के अनुसार, अब परीक्षा केंद्रों पर साधारण जैमर्स के बजाय ‘एडवांस 5G कम्पेटिबल हाई-फ्रीक्वेंसी जैमर्स’ लगाए जाएंगे। ये जैमर्स परीक्षा हॉल के भीतर 5G, 4G, वाई-फाई, ब्लूटूथ और रेडियो फ्रीक्वेंसी के सभी सिग्नलों को पूरी तरह से ब्लॉक (Blackout) कर देंगे। टेंडर की शर्तों के मुताबिक, वेंडर्स को परीक्षा शुरू होने से दो घंटे पहले और परीक्षा खत्म होने के एक घंटे बाद तक निर्बाध सिग्नल ब्लॉकिंग की गारंटी देनी होगी।
बायोमेट्रिक और एआई (AI) आधारित सुरक्षा
टेंडर में केवल लॉकर और जैमर ही शामिल नहीं हैं, बल्कि परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा के बहु-स्तरीय ढांचे (Multi-layered security) को विकसित करने की बात कही गई है। अब परीक्षा केंद्रों में प्रवेश के समय अभ्यर्थियों का एआई-आधारित फेस रिकग्निशन (Face Recognition) और रीयल-टाइम थम्ब इम्प्रैशन लिया जाएगा, जिसका मिलान सीधे उनके आधार या पहचान डेटा से किया जाएगा। इससे छद्म परीक्षार्थियों (Proxy Candidates) या सॉल्वर गैंग के सदस्यों का परीक्षा में बैठना नामुमकिन हो जाएगा।
छात्रों और अभिभावकों में विश्वास बहाली की कोशिश
एनटीए के महानिदेशक के अनुसार, इस अत्याधुनिक तकनीक को लागू करने का मुख्य उद्देश्य देश के करोड़ों ईमानदार छात्रों के भविष्य की रक्षा करना और परीक्षा प्रणाली में खोए हुए जन-विश्वास को वापस लाना है। प्रयागराज और अन्य बड़े कोचिंग हब के विशेषज्ञों और प्रतियोगी छात्रों ने एनटीए के इस तकनीकी कदम का स्वागत किया है, लेकिन उनका यह भी कहना है कि नियमों को केवल कागजों पर कड़ा करने के बजाय जमीनी स्तर पर इसका कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करना होगा। इस नए टेंडर के आने से यह साफ है कि आगामी सत्र की राष्ट्रीय परीक्षाएं अब सुरक्षा के एक नए अभेद्य किले के भीतर आयोजित की जाएंगी।



