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संसद का मानसून सत्र: हंगामेदार सत्र से पहले सुचारू कामकाज की कवायद, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 14 जुलाई को बुलाई सर्वदलीय बैठक

अभिषेक सिंह/  नई दिल्ली: संसद के आगामी मानसून सत्र (Monsoon Session) को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनावों और नई सरकार के गठन के बाद यह पहला ऐसा बड़ा सत्र है जिसमें पूर्ण बजट पेश किया जाना है। विपक्ष के आक्रामक तेवरों और कई ज्वलंत मुद्दों को देखते हुए, लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) ओम बिरला ने सदन का सुचारू और शांतिपूर्ण संचालन सुनिश्चित करने के लिए 14 जुलाई को एक महत्वपूर्ण ‘सर्वदलीय बैठक’ (All-Party Meeting) बुलाई है।

विपक्ष की घेराबंदी की तैयारी

यह मानसून सत्र बेहद हंगामेदार रहने के पूरे आसार हैं। विपक्षी गठबंधन (INDIA ब्लॉक) ने सरकार को घेरने के लिए अपनी रणनीति तैयार कर ली है। विपक्ष के प्रमुख एजेंडे में नीट (NEET) परीक्षा में हुई कथित धांधली, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी के ऐतिहासिक आंकड़े, और हाल ही में देश भर में लागू किए गए नए आपराधिक कानूनों (भारतीय न्याय संहिता) का विरोध शामिल है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इन अहम मुद्दों पर चर्चा से बचती है, इसलिए वे इस सत्र में कार्यस्थगन प्रस्ताव (Adjournment Motion) लाकर सीधे बहस की मांग करेंगे।

अध्यक्ष की पहल और सरकार का रुख

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा बुलाई गई इस बैठक में संसद के दोनों सदनों में प्रतिनिधित्व करने वाले सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के नेता (Floor Leaders) शामिल होंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य यह तय करना है कि महत्वपूर्ण विधायी कार्यों (Legislative Business) और बजट पर चर्चा के लिए पर्याप्त समय निकाला जा सके, और शोर-शराबे या वेल में आकर नारेबाजी के कारण सदन का समय बर्बाद न हो।

संसदीय कार्य मंत्री ने भी स्पष्ट किया है कि सरकार विपक्ष द्वारा उठाए गए किसी भी रचनात्मक मुद्दे पर नियमों के तहत चर्चा करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। सरकार की प्राथमिकता इस सत्र में आम बजट 2026-27 को पारित कराना और कुछ अहम लंबित विधेयकों को कानून का रूप देना है।

लोकतांत्रिक बहस की आवश्यकता

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जनता ने विपक्ष को इस बार मजबूत संख्याबल दिया है, इसलिए उनकी जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। सड़क की राजनीति से अलग हटकर, देश की जनता चाहती है कि संसद में नीतियों पर सार्थक बहस हो। 14 जुलाई की सर्वदलीय बैठक से यह तय हो जाएगा कि आगामी मानसून सत्र टकराव की भेंट चढ़ेगा या इसमें देशहित के मुद्दों पर कोई ठोस और सकारात्मक बहस देखने को मिलेगी।

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