उच्च शिक्षा में बड़ा क्रांतिकारी बदलाव: नई शिक्षा नीति के तहत दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने शुरू किए एक-वर्षीय पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम, दाखिला प्रक्रिया शुरू

राघवेंद्र प्रताप सिंह/ नई दिल्ली: देश की उच्च शिक्षा प्रणाली (Higher Education System) को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने की दिशा में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। भारत के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शुमार दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University – DU) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के प्रावधानों को पूरी तरह से लागू करते हुए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नए ‘एक-वर्षीय पोस्टग्रेजुएट (PG)’ प्रोग्राम्स की आधिकारिक शुरुआत कर दी है। इसके साथ ही इन नए कोर्सेज में दाखिले की प्रक्रिया भी आज से डीयू के आधिकारिक पोर्टल पर लाइव हो गई है।
अब तक भारत में मास्टर डिग्री (Master’s Degree) हासिल करने के लिए छात्रों को अनिवार्य रूप से दो साल का समय देना पड़ता था। लेकिन नई शिक्षा नीति के तहत लाए गए इस बड़े बदलाव से उन छात्रों को भारी राहत मिलेगी जिन्होंने 4 वर्षीय अंडरग्रेजुएट (Four-Year UG – Honours with Research) कोर्स पूरा किया है। जिन छात्रों ने अपने स्नातक के चौथे वर्ष में गहन शोध (Research) कार्य किया है, वे अब सीधे इस एक वर्षीय पीजी प्रोग्राम में दाखिला ले सकेंगे और मात्र एक साल में अपनी मास्टर्स की डिग्री हासिल कर सकेंगे।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, यह एक-वर्षीय पीजी प्रोग्राम विशेष रूप से शोध (Research), नवाचार (Innovation) और उद्योग की मांगों (Industry demands) को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इसका पाठ्यक्रम बेहद सघन होगा, जिसमें छात्रों को सीधे एडवांस लेवल की पढ़ाई और थीसिस (Thesis) राइटिंग पर फोकस करना होगा। यह अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों (जैसे यूके और अमेरिका) के मास्टर्स प्रोग्राम्स के समकक्ष होगा, जिससे भारतीय छात्रों को विदेशों में उच्च शिक्षा या नौकरी के लिए आसानी से मान्यता मिल सकेगी।
शिक्षाविदों का मानना है कि यह बदलाव छात्रों के समय और संसाधनों दोनों की बचत करेगा। इससे छात्र कम उम्र में ही पीएचडी (PhD) या कॉर्पोरेट जगत में प्रवेश करने के लिए तैयार हो सकेंगे। फिलहाल यह एक-वर्षीय सुविधा विज्ञान, वाणिज्य और मानविकी के चुनिंदा प्रमुख विषयों में शुरू की गई है। इसके लिए दाखिले सीयूईटी-पीजी (CUET-PG) के स्कोर और मेरिट के आधार पर किए जाएंगे। इस नई पहल से डीयू ने देश के अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए भी एक बड़ा उदाहरण पेश किया है, जिनके भी जल्द ही इस मॉडल को अपनाने की उम्मीद है।



