भारत की बड़ी वैश्विक पहल: गुवाहाटी में ‘ब्रिक्स’ (BRICS) एंटी-ड्रग्स शिखर सम्मेलन का आगाज, सिंथेटिक ड्रग्स और नार्को-टेररिज्म पर मुख्य फोकस

विवेक ओझा / गुवाहाटी/नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मादक पदार्थों की तस्करी और नार्को-टेररिज्म (Narco-Terrorism) पर नकेल कसने के उद्देश्य से भारत ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार की मेजबानी में आज (7 जुलाई) असम के गुवाहाटी में दो दिवसीय ‘ब्रिक्स’ (BRICS) एंटी-ड्रग्स शिखर सम्मेलन का भव्य आगाज हुआ है। इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका और नए सदस्य राष्ट्रों) के शीर्ष सुरक्षा सलाहकार, मादक पदार्थ नियंत्रण एजेंसियों के प्रमुख और गृह मंत्रालयों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।
इस वर्ष के शिखर सम्मेलन का मुख्य फोकस ‘सिंथेटिक ड्रग्स’ (जैसे फेंटानिल, मेथमफेटामाइन) के बढ़ते वैश्विक खतरे और डार्क वेब के माध्यम से हो रही इनकी अवैध ऑनलाइन बिक्री पर लगाम लगाना है। भारत की ओर से नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और गृह मंत्रालय इस सम्मेलन का नेतृत्व कर रहे हैं। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए भारतीय प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि मादक पदार्थों की तस्करी अब केवल एक सामाजिक अपराध नहीं रह गई है, बल्कि यह सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के वित्तपोषण (Terror Funding) से जुड़ चुकी है।
सम्मेलन के दौरान ब्रिक्स देशों के बीच एक ‘ज्वाइंट इंटेलिजेंस शेयरिंग नेटवर्क’ (Joint Intelligence Sharing Network) बनाने पर सहमति बनने की उम्मीद है। इसके तहत सभी सदस्य देश रियल-टाइम में ड्रग सिंडिकेट्स, उनके वित्तीय लेन-देन और तस्करी के नए मार्गों (विशेषकर समुद्री मार्गों) से जुड़ी खुफिया जानकारी एक-दूसरे से साझा करेंगे। भारत, जो ‘गोल्डन क्रीसेंट’ (अफगानिस्तान, ईरान, पाकिस्तान) और ‘गोल्डन ट्रायंगल’ (म्यांमार, थाईलैंड, लाओस) के बीच स्थित होने के कारण तस्करी के भारी दबाव का सामना करता है, इस सम्मेलन के जरिए सीमा पार से होने वाली ड्रग्स सप्लाई चेन को तोड़ने की रणनीति पर काम कर रहा है।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकारों का मानना है कि गुवाहाटी में हो रहा यह सम्मेलन न केवल पूर्वोत्तर भारत की भू-राजनीतिक महत्ता को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की उस प्रतिबद्धता को भी पुष्ट करता है जिसमें वह ‘ड्रग-फ्री वर्ल्ड’ (नशामुक्त विश्व) के निर्माण में एक अग्रणी भूमिका निभा रहा है। अगले 48 घंटों में इस सम्मेलन से कई बड़े तकनीकी और सुरक्षा समझौतों के निष्कर्ष निकलने की संभावना है।



