राम मंदिर के चढ़ावे पर सियासी घमासान
अखिलेश यादव ने लगाए करोड़ों की हेराफेरी के आरोप, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने किया कड़ा पलटवार

अयोध्या (राघवेंद्र प्रताप सिंह): उत्तर प्रदेश की राजनीति में श्री राम जन्मभूमि मंदिर एक बार फिर से सियासी बहस और विवाद के केंद्र में आ गया है। इस बार विवाद का कारण मंदिर का निर्माण नहीं, बल्कि रामलला के दरबार में आ रहा अथाह चढ़ावा और दान है। समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राम मंदिर ट्रस्ट पर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाते हुए दावा किया है कि मंदिर के चढ़ावे और दान के पैसों में करोड़ों रुपये की भारी वित्तीय हेराफेरी की गई है। इस बयान के बाद राज्य का सियासी पारा अपने चरम पर पहुंच गया है।
सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की मांग
अखिलेश यादव ने मीडिया और सार्वजनिक मंचों के जरिए सरकार तथा राम मंदिर ट्रस्ट को सीधे कटघरे में खड़ा किया। सपा प्रमुख ने कहा कि देश और दुनिया भर के करोड़ों रामभक्तों ने अपनी गाढ़ी कमाई और अगाध श्रद्धा के साथ मंदिर निर्माण और रामलला के लिए दान दिया है। लेकिन जिस तरह से चढ़ावे के प्रबंधन में अपारदर्शिता और अनियमितताओं की खबरें सामने आ रही हैं, वह सीधे तौर पर सनातन धर्म की आस्था के साथ खिलवाड़ है।
अखिलेश यादव ने देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) से इस संवेदनशील मामले का स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognizance) लेने की पुरजोर मांग की है। उनका तर्क है कि एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और उच्च स्तरीय न्यायिक जांच के जरिए ही पाई-पाई का हिसाब जनता के सामने आ सकता है और दोषियों पर कार्रवाई हो सकती है।
चंपत राय ने आरोपों को बताया निराधार और राजनीति से प्रेरित
सपा प्रमुख के इन गंभीर आरोपों पर ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ ने तुरंत और कड़ा पलटवार किया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अखिलेश यादव के सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह से भ्रामक, तथ्यहीन और राजनीति से प्रेरित करार दिया है। चंपत राय ने स्पष्ट किया कि राम मंदिर के चढ़ावे और सभी बैंक खातों का पाई-पाई का हिसाब रखा जाता है और देश के प्रतिष्ठित चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CAs) द्वारा इसकी नियमित और पारदर्शी ऑडिटिंग की जाती है।
उन्होंने विपक्ष पर आस्था के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक दल अपनी खोई हुई सियासी जमीन वापस पाने के लिए भगवान राम और मंदिर ट्रस्ट को बदनाम करने की ओछी साजिश रच रहे हैं। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि दान की गई पूरी राशि पूरी तरह सुरक्षित है और इसका उपयोग अत्यधिक पारदर्शिता के साथ मंदिर के भव्य निर्माण और यात्री सुविधाओं के विस्तार में ही किया जा रहा है। इस आरोप-प्रत्यारोप ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया और गरमागरम मुद्दा उछाल दिया है।



