व्हाइट हाउस को बड़ा झटका
अमेरिकी संसद ने पास किया वार पावर्स रेजोल्यूशन, ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर लगी रोक!

वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी संसद (कांग्रेस) ने एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व कदम उठाया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका देते हुए उनके सैन्य अधिकारों को सीमित करने वाला एक विशेष प्रस्ताव भारी बहुमत से पारित कर दिया है। इस नए प्रस्ताव के तहत राष्ट्रपति अब संसद की स्पष्ट मंजूरी के बिना ईरान के खिलाफ किसी भी तरह की प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई या युद्ध की घोषणा नहीं कर सकेंगे।
वार पावर्स रेजोल्यूशन: संसद के फैसले की पूरी इनसाइड स्टोरी
मध्य पूर्व में पिछले कुछ हफ्तों से चल रही तनावपूर्ण स्थिति के बीच अमेरिकी संसद का यह फैसला व्हाइट हाउस की आक्रामक विदेश नीति पर एक बड़े अंकुश के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिकी कांग्रेस में इस प्रस्ताव पर लंबी और तीखी बहस हुई, जिसके बाद विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी और कुछ असंतुष्ट रिपब्लिकन सांसदों ने मिलकर इसके पक्ष में मतदान किया।
इस विशेष कानून, जिसे ‘वार पावर्स रेजोल्यूशन’ (War Powers Resolution) कहा जा रहा है, का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रपति की युद्ध शुरू करने की शक्तियों को नियंत्रित करना है। इसके पारित होने के बाद, अमेरिकी सेना को ईरान या उसके सहयोगियों के खिलाफ किसी भी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई को तुरंत रोकना होगा। साथ ही, मध्य पूर्व के संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने की प्रक्रिया शुरू करनी होगी, बशर्ते संसद खुद युद्ध की औपचारिक घोषणा न कर दे।
संसद और व्हाइट हाउस के बीच बढ़ता टकराव
अमेरिकी संविधान के अनुसार, किसी देश के खिलाफ युद्ध की घोषणा करने का अंतिम अधिकार संसद के पास है, लेकिन व्यावहारिक रूप से राष्ट्रपति अक्सर सुरक्षा कारणों का हवाला देकर सैन्य कदम उठा लेते हैं। हाल ही में ओमान की खाड़ी और सीरिया की सीमाओं पर हुई सैन्य झड़पों के बाद संसद को यह महसूस हुआ कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर जा सकती है, जिसके कारण यह कड़ा कदम उठाया गया।
> “हम अमेरिका को मध्य पूर्व में एक और अंतहीन और विनाशकारी युद्ध में धकेले जाने की अनुमति नहीं दे सकते। अमेरिकी जनता युद्ध नहीं, शांति चाहती है। हमारे सैनिकों की जान की कीमत किसी भी राजनीतिक एजेंडे से कहीं बढ़कर है। राष्ट्रपति को कोई भी बड़ा कदम उठाने से पहले संसद को विश्वास में लेना ही होगा।”
> — नैन्सी पेलोसी, वरिष्ठ सांसद एवं पूर्व स्पीकर, अमेरिकी प्रतिनिधि सभा
वैश्विक बाजार और आम जनता पर क्या होगा असर?
अमेरिकी संसद के इस अप्रत्याशित और बड़े फैसले का सीधा असर वैश्विक भू-राजनीति (Geopolitics) और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर देखने को मिल रहा है:
* कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट: अमेरिका और ईरान के बीच पूर्ण युद्ध की आशंका टलने की खबर से वैश्विक तेल बाजार को बड़ी राहत मिली है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की आसमान छूती कीमतों में अचानक बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे भारत सहित कई विकासशील देशों को बड़ी राहत मिलेगी।
* शेयर बाजारों में तेजी: युद्ध का खतरा कम होने से वैश्विक शेयर बाजारों (Stock Markets) में भारी रौनक लौट आई है। अमेरिकी शेयर बाजार के साथ-साथ एशियाई और यूरोपीय बाजारों में निवेशकों ने राहत की सांस ली है, जिससे सूचकांकों में बड़ा उछाल देखा गया।
* सैनिकों के परिवारों में खुशी: मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिकों के परिवारों ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया है। लंबे समय से अपने परिजनों की सुरक्षा को लेकर चिंतित लोगों के लिए सैनिकों की घर वापसी की उम्मीद एक बड़ी खुशखबरी बनकर आई है।
अमेरिकी संसद द्वारा पारित यह वार पावर्स प्रस्ताव राष्ट्रपति ट्रंप की आक्रामक विदेश नीति के लिए एक बड़ी वैधानिक चुनौती है। यह कदम अमेरिकी लोकतंत्र में शक्तियों के संतुलन (Checks and Balances) को फिर से स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।
हालांकि, आगे की राह इतनी आसान नहीं है। अमेरिकी राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि व्हाइट हाउस इस प्रस्ताव को आसानी से स्वीकार नहीं करेगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास इस कानून को खारिज करने के लिए ‘वीटो पावर’ (Veto Power) का उपयोग करने का विकल्प मौजूद है। यदि राष्ट्रपति वीटो का इस्तेमाल करते हैं, तो संसद को इस कानून को दोबारा प्रभावी बनाने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी। आने वाले दिनों में वाशिंगटन में सत्ता के गलियारों के भीतर कानूनी और राजनीतिक रस्साकशी और तेज होने की पूरी संभावना है।



