बिहार में ‘बंगला सियासत’ पर आर-पार
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का लालू परिवार पर तीखा हमला, कहा- 'यह कोई राजतंत्र नहीं जहां मां और बेटे दोनों को अलग-अलग बंगला चाहिए'

पटना/मुजफ्फरपुर, 3 जून 2026:बिहार की राजनीति में इन दिनों एक सरकारी बंगले को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग चरम पर पहुंच गई है। बिहार के नवनियुक्त मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी बंगले को खाली न करने के अड़ियल रुख पर पहली बार खुलकर अपनी बात रखी है। मुजफ्फरपुर के मोतीपुर और शेखपुरा में आयोजित ‘सहयोग कैंप’ के दौरान जनता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने लालू प्रसाद यादव के परिवार पर तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि कोई भी सरकारी बंगला किसी की बपौती या पैतृक संपत्ति नहीं है। उन्होंने साफ किया कि देश में लोकतंत्र है, राजतंत्र नहीं, इसलिए नियमों के तहत राबड़ी देवी को अपना वर्तमान बंगला हर हाल में खाली करना ही होगा और इस धरती पर कोई भी उन्हें ऐसा करने से नहीं रोक सकता।
इस पूरे विवाद की जड़ पटना का ’10, सर्कुलर रोड’ स्थित वह आलीशान बंगला है, जिसमें राबड़ी देवी पिछले कई सालों से रह रही हैं। भवन निर्माण विभाग (BCD) ने हाल ही में यह बंगला राज्य के डेयरी और मत्स्य पालन मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित कर दिया है और राबड़ी देवी को विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष के नाते ’39, हार्डिंग रोड’ पर नया बंगला अलॉट किया गया है। विभाग द्वारा राबड़ी देवी को 15 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए बंगला खाली करने का नोटिस थमाया गया है, लेकिन उन्होंने इसे खाली करने से साफ इनकार करते हुए सरकार को चुनौती दी है कि अगर दम है तो पुलिस बल का प्रयोग करके उन्हें बेदखल करके दिखाए। इसी चुनौती पर पलटवार करते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि कुछ लोगों को सरकारी बंगलों से इतना ज्यादा मोह हो गया है कि वे जनता की परवाह छोड़ चुके हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज अजीब स्थिति है, मां को अलग बंगला चाहिए और उनके बेटे (तेजस्वी यादव, जो 1, पोलो रोड स्थित बंगले में रहते हैं) को अलग बंगला चाहिए।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस दौरान खुद का उदाहरण देते हुए अपनी सादगी और कर्तव्यनिष्ठा को जनता के सामने रखा। उन्होंने कहा कि वे सन 1999 से लगातार सरकार में मंत्री और विभिन्न अहम पदों पर रहे हैं, यहां तक कि बिहार के गृह मंत्री भी रहे, लेकिन वे हमेशा अपने 2400 स्क्वायर फीट के निजी मकान में ही रहे। उन्होंने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बार-बार आग्रह करने के बाद ही वे मुख्यमंत्री आवास ‘1, अणे मार्ग’ में शिफ्ट हुए, जिसे उनकी सरकार ने अब ‘लोक सेवक आवास’ या ‘लोक सेवक भवन’ का नया नाम दिया है। चौधरी ने कहा कि उनके राजनीतिक जीवन का यह 11वां घर है और जिस दिन उनके शीर्ष नेता उनसे पद छोड़ने को कहेंगे, वे बिना एक पल गंवाए अपना बैग समेटकर अपने निजी घर लौट जाएंगे।
दूसरी तरफ, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने सरकार की इस कार्रवाई को पूरी तरह से बदले की राजनीति (Vendetta Politics) करार दिया है। आरजेडी के राष्ट्रीय महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी ने एनडीए सरकार पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया है कि सरकार जानबूझकर विपक्ष के बड़े नेताओं को निशाना बना रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री के आवास को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि लोकतंत्र की खूबसूरती सरकार की कमियों को उजागर करने में है, न कि इस तरह की दमनकारी कार्रवाई में। बहरहाल, भवन निर्माण मंत्री लेसी सिंह ने भी साफ कर दिया है कि नियम सबके लिए बराबर हैं और राबड़ी देवी को निर्धारित समय के भीतर हार्डिंग रोड वाले नए बंगले में शिफ्ट होना ही पड़ेगा। आने वाले दिनों में पटना की सड़कों पर इस बंगले को लेकर सियासी ड्रामा और तेज होने की पूरी संभावना है।



