कर्नाटक की राजनीति में भारी उलटफेर
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का इस्तीफा मंजूर, क्या अब कांग्रेस में होगा नेतृत्व परिवर्तन?

दक्षिण भारत में कांग्रेस के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण दुर्ग यानी कर्नाटक में एक बड़ा सियासी भूचाल आ गया है। महीनों से चल रही अंदरूनी खींचतान और ‘पावर-शेयरिंग’ (सत्ता की साझेदारी) के फॉर्मूले पर जारी कयासों के बीच, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपना इस्तीफा सौंप दिया है, जिसे राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। इस घटनाक्रम ने राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की पटकथा को पूरी तरह से साफ कर दिया है, और अब सबकी निगाहें दिल्ली में बैठे कांग्रेस आलाकमान पर टिक गई हैं।
कर्नाटक में वर्ष 2023 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने 135 सीटों के भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की थी। लेकिन उसी समय से मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार के बीच तीखी रस्साकशी चल रही थी। उस समय कांग्रेस आलाकमान (मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी) ने बीच-बचाव करते हुए एक ‘रोटेशनल मुख्यमंत्री’ (Rotational Chief Minister) का अलिखित फॉर्मूला तय किया था, जिसके तहत सिद्धारमैया को पहले ढाई साल और डी.के. शिवकुमार को बचे हुए ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद सौंपा जाना था।
सिद्धारमैया का यह इस्तीफा उसी राजनीतिक समझौते का परिणाम माना जा रहा है। हालांकि, सिद्धारमैया गुट के कई विधायकों ने हाल के दिनों में इस फॉर्मूले का विरोध करते हुए उन्हें ही पूरे 5 साल मुख्यमंत्री बनाए रखने की मांग की थी, जिससे पार्टी के भीतर बगावत का खतरा पैदा हो गया था।
आगे का रास्ता और डी.के. शिवकुमार की दावेदारी:
सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद अब डी.के. शिवकुमार (D.K. Shivakumar) का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। शिवकुमार पार्टी के एक कुशल रणनीतिकार और ‘संकटमोचक’ (Troubleshooter) माने जाते हैं। वोक्कालिगा (Vokkaliga) समुदाय से आने वाले शिवकुमार का संगठन पर गहरा नियंत्रण है।
हालांकि, नई सरकार के गठन में सबसे बड़ी चुनौती कैबिनेट का पुनर्गठन होगी। सिद्धारमैया के वफादार विधायकों को शांत रखने के लिए उन्हें मलाईदार मंत्रालय देने पड़ेंगे। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल सेक्युलर (JDS) का गठबंधन इस पूरी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है। यदि कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखने में थोड़ी भी चूक करती है, तो राज्य में ‘ऑपरेशन लोटस’ (Operation Lotus) की वापसी से इनकार नहीं किया जा सकता।



