बॉर्डर पर बढ़ेगी चौकसी, दुश्मनों को कड़ा संदेश
गृह मंत्री अमित शाह आज से 3 हफ्तों के सीमाई दौरे पर, राजस्थान से करेंगे शुरुआत

राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) को सर्वोपरि रखते हुए और सीमा पर तैनात जवानों का मनोबल बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और लंबे सीमाई दौरे पर निकल रहे हैं। अगले 3 हफ्तों तक चलने वाले इस महा-अभियान की शुरुआत राजस्थान से होगी। इस दौरान गृह मंत्री पाकिस्तान और बांग्लादेश से सटी भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और ‘फॉरवर्ड आउटपोस्ट्स’ (BOPs) का स्वयं जमीनी स्तर पर मुआयना करेंगे और सुरक्षा ग्रिड की समीक्षा करेंगे।
भारत की सीमाओं पर मंडराते नए खतरों—जैसे ड्रोन के जरिए हथियारों और ड्रग्स की तस्करी, अवैध घुसपैठ और जनसांख्यिकीय बदलाव—से निपटने के लिए केंद्र सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की नीति पर काम कर रही है। सीमा सुरक्षा को अभेद्य बनाने और सुरक्षा बलों की परिचालन तैयारियों (Operational Readiness) का जायजा लेने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एक 3 सप्ताह के गहन सीमावर्ती दौरे की शुरुआत कर रहे हैं।
राजस्थान के पश्चिमी बॉर्डर से शंखनाद
गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस दौरे के पहले चरण की शुरुआत राजस्थान में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से हो रही है। राजस्थान के जैसलमेर और बाड़मेर के तपे हुए रेगिस्तानी इलाकों में सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवान 50 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी मुस्तैदी से डटे रहते हैं। गृह मंत्री शाह सीधे इन ‘फॉरवर्ड आउटपोस्ट्स’ (अग्रिम चौकियों) पर जाएंगे। वे वहां जवानों के साथ समय बिताएंगे, उनके साथ भोजन करेंगे और सीमा पर उन्हें पेश आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को सीधे तौर पर सुनेंगे।
पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा का पूरा खाका
राजस्थान के बाद यह दौरा गुजरात के कच्छ के रण, पंजाब के संवेदनशील सीमाई इलाकों और जम्मू-कश्मीर की अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) तक जाएगा। पाकिस्तान सीमा पर हाल के दिनों में ड्रोन (Drones) के माध्यम से नशीले पदार्थों (Narcotics) और छोटे हथियारों की तस्करी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। गृह मंत्री एंटी-ड्रोन तकनीक (Anti-Drone Technology) और ‘स्मार्ट फेंसिंग’ (Smart Fencing) के काम की प्रगति की समीक्षा करेंगे।
दौरे के दूसरे और तीसरे हफ्ते में गृह मंत्री का पूरा फोकस पूर्वी मोर्चे यानी भारत-बांग्लादेश सीमा पर होगा। पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा से सटी सीमाओं पर अवैध इमिग्रेशन (घुसपैठ) और पशु तस्करी की समस्या हमेशा से राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सिरदर्द रही है। वहां नदियों और जंगलों से घिरी जटिल सीमाओं की सुरक्षा व्यवस्था और बीएसएफ के ‘वाटर विंग’ (Water Wing) की तैयारियों का जायजा लिया जाएगा।
सुरक्षाबलों के आधुनिकीकरण पर जोर
इस लंबे दौरे का एक अन्य प्रमुख उद्देश्य सीमावर्ती बुनियादी ढांचे (Border Infrastructure) का निरीक्षण करना है। केंद्र सरकार ने हाल के वर्षों में सड़कों के निर्माण, फ्लडलाइट्स लगाने और जवानों के लिए आधुनिक बैरकों के निर्माण पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए हैं। गृह मंत्री इन परियोजनाओं की गति की स्वयं निगरानी करेंगे।
दुश्मनों के लिए स्पष्ट संदेश
कूटनीतिक और रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि देश के गृह मंत्री का लगातार 3 सप्ताह तक सीमाओं पर मौजूद रहना कोई सामान्य प्रशासनिक कदम नहीं है। यह पड़ोसी देशों—विशेषकर पाकिस्तान—के लिए एक बेहद सख्त और स्पष्ट संदेश है कि भारत अपनी संप्रभुता (Sovereignty) और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए पूरी तरह से मुस्तैद और प्रतिबद्ध है। यह दौरा न केवल सुरक्षा तंत्र की कमियों को दूर करेगा, बल्कि सीमा प्रहरियों में एक नई ऊर्जा का संचार भी करेगा।



