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पश्चिम बंगाल चुनाव: 4 मई को आएंगे महा-नतीजे, उससे पहले फलता के 285 बूथों पर भारी सुरक्षा के बीच हो रहा पुनर्मतदान

 कोलकाता (चुनाव डेस्क): पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बहुप्रतीक्षित और ऐतिहासिक नतीजे कल यानी 4 मई 2026 को घोषित होने जा रहे हैं। पूरे देश की राजनीतिक निगाहें इस हाई-प्रोफाइल चुनाव के परिणामों पर टिकी हुई हैं। लेकिन चुनाव परिणामों की आधिकारिक घोषणा से ठीक एक दिन पहले, चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाते हुए राज्य की फलता विधानसभा सीट के 285 बूथों पर आज (3 मई) पुनर्मतदान (Repolling) कराने का आदेश दिया है। कल होने वाली महा-मतगणना से पहले हो रही इस रिपोलिंग और राज्य भर में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजामों ने बंगाल के राजनीतिक माहौल को और भी अधिक गरमा दिया है।

फलता में क्यों हो रहा है पुनर्मतदान?
चुनाव आयोग को फलता विधानसभा क्षेत्र में मतदान के दिन व्यापक स्तर पर गड़बड़ी, छिटपुट हिंसा और बूथ कैप्चरिंग की कई गंभीर शिकायतें मिली थीं। विभिन्न राजनीतिक दलों ने आरोप लगाया था कि उनके पोलिंग एजेंटों को बूथों के अंदर नहीं बैठने दिया गया और मतदाताओं को डरा-धमका कर फर्जी वोटिंग (Bogus Voting) की गई। इन शिकायतों का कड़ाई से संज्ञान लेते हुए और चुनाव पर्यवेक्षकों की विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर, चुनाव आयोग ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने के लिए फलता के पूरे 285 बूथों पर आज दोबारा मतदान कराने का कड़ा फैसला लिया है। आज सुबह से ही इन बूथों पर शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) की भारी तैनाती की गई है और चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है।

मतगणना के लिए स्ट्रॉन्ग रूम्स की अभेद्य सुरक्षा
कल होने वाली महा-मतगणना को लेकर चुनाव आयोग किसी भी तरह की कोई कोताही बरतने के मूड में नहीं है। राज्य के सभी जिलों में बनाए गए स्ट्रॉन्ग रूम्स, जहां इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (EVM) और वीवीपैट (VVPAT) सुरक्षित रखी गई हैं, वहां ‘त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा’ (Three-Tier Security) लागू किया गया है। सबसे भीतरी घेरे की सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी तरह से केंद्रीय बलों के पास है, जबकि दूसरे और तीसरे घेरे में राज्य सशस्त्र पुलिस बल और स्थानीय पुलिस मुस्तैद है। इसके अलावा, सभी स्ट्रॉन्ग रूम्स और मतगणना केंद्रों की 24 घंटे उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के जरिए निगरानी की जा रही है, जिसका सीधा फीड चुनाव आयोग के नियंत्रण कक्ष में जा रहा है।

राजनीतिक दलों की धड़कनें तेज, दांव पर साख
बंगाल का यह चुनाव सिर्फ एक राज्य का चुनाव नहीं है, बल्कि इसे आगामी राष्ट्रीय राजनीति के लिए एक अहम ‘लिटमस टेस्ट’ माना जा रहा है। सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने चुनाव प्रचार में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी और अब सभी की धड़कनें तेज हैं। पार्टी मुख्यालयों में रणनीतिक बैठकों का दौर जारी है और कल सुबह 8 बजे से शुरू होने वाली मतगणना के शुरुआती रुझानों का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है। उम्मीदवारों के समर्थकों में भी भारी उत्साह और बेचैनी दोनों एक साथ देखी जा सकती है।

कल तय होगा बंगाल का राजनीतिक भविष्य
बंगाल की जनता ने इस बार अपना जनादेश पूरी तरह से ईवीएम में कैद कर दिया है। कल सुबह जैसे-जैसे ईवीएम खुलेंगी, वैसे-वैसे यह साफ होता जाएगा कि बंगाल की सत्ता का ताज किसके सिर सजेगा। चुनाव आयोग ने मतगणना के दौरान और उसके बाद किसी भी तरह के विजय जुलूस या जश्न पर कड़ी पाबंदियां लगाई हैं ताकि किसी भी प्रकार की चुनाव बाद हिंसा (Post-Poll Violence) की गुंजाइश को खत्म किया जा सके। फिलहाल, पूरे राज्य में हाई अलर्ट जैसी स्थिति बनी हुई है और संवेदनशील इलाकों में पुलिस लगातार फ्लैग मार्च कर रही है। कल का दिन बंगाल और देश की राजनीति के लिए बेहद अहम होने वाला है।

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