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धोनी की विकेटकीपिंग पर अश्विन का बड़ा बयान, कहा—उन जैसा कोई नहीं

रविचंद्रन अश्विन ने महेंद्र सिंह धोनी की जमकर सराहना की है और कहा है कि उन्होंने स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ विकेट के पीछे धोनी जैसी विकेटकीपिंग किसी और की नहीं देखी।

भारतीय टीम और चेन्नई सुपर किंग्स में लंबे समय तक साथ खेलने वाले अश्विन ने याद किया कि धोनी की विकेटकीपिंग स्किल्स और उनकी साफ-सुथरी सोच, उनकी कप्तानी से भी ज्यादा अलग और प्रभावशाली थीं।

अश्विन ने एक बातचीत में कहा कि लोग धोनी की कप्तानी की खूब तारीफ करते हैं, और यह पूरी तरह सही भी है क्योंकि उनकी उपलब्धियां खुद सब कुछ कह देती हैं। लेकिन उनके अनुसार धोनी के बारे में दो चीजें सबसे खास थीं। पहली, वह मध्यक्रम में बेहतरीन बल्लेबाज थे जो मैच को आखिरी तक ले जाकर सही नतीजे के साथ खत्म कर सकते थे।

साभार : गूगल

दूसरी बात, स्पिनरों के खिलाफ उनकी विकेटकीपिंग। अश्विन ने कहा कि उन्होंने कभी किसी और विकेटकीपर को इस स्तर पर नहीं देखा। उन्होंने यह भी बताया कि धोनी गेंदबाजी और रणनीति में ज्यादा हस्तक्षेप नहीं करते थे। अश्विन के मुताबिक, धोनी उन्हें फील्ड सेट करने के लिए निर्देश नहीं देते थे, बल्कि उन्हें खुद अपनी फील्डिंग लगाने की आजादी होती थी।

धोनी अक्सर यही कहते थे कि ज्यादा अनुमान मत लगाओ, अगर गेंद पर शॉट लग भी जाए तो चिंता मत करो, और अगर कोई बल्लेबाज जोखिम लेना चाहता है तो उसे लेने दो, बस अपनी योजना के हिसाब से गेंदबाजी करो। अश्विन के अनुसार, धोनी का उन पर पूरा भरोसा रहता था।

अश्विन ने 2011 के आईपीएल फाइनल को भी याद किया, जब उन्होंने क्रिस गेल को शून्य पर आउट किया था, और उस समय विकेट के पीछे धोनी के शानदार कैच की खास तारीफ की। उन्होंने कहा कि उस मैच में रणनीति और विकेट गिरने जैसी कई बातें अहम थीं, लेकिन धोनी का कैच असाधारण था।

अपने आईपीएल करियर में अश्विन ने 2009 से 2025 तक पांच अलग-अलग फ्रेंचाइज़ियों के लिए खेला और 221 मैचों में 187 विकेट हासिल किए। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि 2018-19 में पंजाब किंग्स की कप्तानी करते समय उन्होंने पूरी कोशिश की, लेकिन वह टीम को पूरी तरह अपना नहीं बना सके। हालांकि कप्तान के रूप में उन्हें ज्यादा सफलता नहीं मिली, लेकिन उस अनुभव से उन्होंने काफी कुछ सीखा।

राजस्थान रॉयल्स के साथ अपने समय को याद करते हुए अश्विन ने कहा कि उन्होंने वहां तीन साल बिताए और उसी अवधि में उन्हें भारतीय टीम में वापसी करने में मदद मिली। उनके अनुसार राजस्थान ने उन्हें बेहतरीन तरीके से इस्तेमाल किया और वहां उन्होंने क्रिकेट का पूरा आनंद लिया। हालांकि उन्हें सिर्फ इस बात का अफसोस है कि वह राजस्थान रॉयल्स के साथ कोई खिताब नहीं जीत पाए।

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