तमिलनाडु और मेघालय में जैव विविधता प्रबंधन के लिए पंचवर्षीय परियोजना की हुई शुरूआत

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने तमिलनाडु और मेघालय में जैव विविधता प्रबंधन के लिए पंचवर्षीय परियोजना शुरू की है। 48 लाख डॉलर से अधिक अनुदान वाली यह परियोजना वर्ष 2025 से 2030 तक के लिए है।
तमिलनाडु में, यह परियोजना मुदुमलाई और सत्यमंगलम बाघ अभ्यारण्यों सहित सत्यमंगलम क्षेत्र को कवर करेगी। मेघालय में, इसे गारो हिल्स क्षेत्र में लागू किया जाएगा, जिसमें नोकरेक जैवमंडल अभ्यारण्य, बालपक्रम राष्ट्रीय उद्यान और सिजू वन्यजीव अभ्यारण्य शामिल हैं।
यह परियोजना पारिस्थितिकी रूप से महत्वपूर्ण दो भू-भागों पर केंद्रित होगी। मंत्रालय ने बताया कि यह पहल पेरिस समझौते के तहत देश की जलवायु संबंधी प्रतिबद्धताओं के अनुरूप भी है।आपको बता दें कि नोकरेक रिजर्व अपनी समृद्ध जैव विविधता और अद्वितीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए प्रसिद्ध है। यह एक जैवविविधता वाला हॉटस्पॉट है, जहां वनस्पतियों और जीवों की व्यापक विविधता पाई जाती है।
यह रिजर्व अपने प्राचीन वनों के लिए जाना जाता है, जिनमें उष्णकटिबंधीय पर्णपाती, सदाबहार और अर्ध-सदाबहार वन शामिल हैं। यह अनेक स्थानिक एवं लुप्तप्राय प्रजातियों का घर है। यह दुर्लभ एवं लुप्तप्राय लाल पांडा का निवास स्थान है। यह एशियाई हाथियों, बाघों, तेंदुओं और हिरणों की विभिन्न प्रजातियों का भी निवास स्थान है। इस रिजर्व में पक्षियों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं। यह रिजर्व अपने साइट्रस जीन अभ्यारण्य के लिए जाना जाता है, जो कि खट्टे फलों के जंगली रिश्तेदारों का घर है।



