उत्तराखंड में मुख्यमंत्री आवास परिसर में शहद उत्पादन जोरों पर

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में शासकीय आवास परिसर में शहद निकालने की प्रक्रिया का अवलोकन किया। परिसर में इस वर्ष मात्र 45 दिनों की अवधि में 520 किलोग्राम शहद का उत्पादन किया गया है। इस दौरान अधिकारियों को स्थानीय लोगों को रोजगार प्रदान करने के उद्देश्य से वन क्षेत्रों में बी-बॉक्स की स्थापना के लिए एक प्रभावी नीति तैयार करने एवं मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के अंतर्गत मधुमक्खी पालन को प्राथमिकता देते हुए विशेष सब्सिडी प्रदान करने सम्बन्धी निर्देश दिए गए ।
साथ ही विश्व पर्यावरण दिवस और हरेला पर्व जैसे अवसरों पर “थ्री-बी” आधारित पौधारोपण अभियान चलाने के लिए भी अधिकारियों को निर्देशित किया। इस प्रकार की पहलें न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक होंगी बल्कि मौन पालन और शहद उत्पादन को भी स्थायी रूप से बढ़ावा देंगी, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलने के साथ स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
आपको बता दें कि उत्तराखंड सरकार ने मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बड़ा फैसला पिछले साल लिया गया है। अब मधुमक्खी पालन योजना के तहत पर-परागण के लिए दी जाने वाली राजसहायता को 350 रुपए प्रति मौनबॉक्स से बढ़ाकर 750 रुपए प्रति मौनबॉक्स कर दिया गया है।
मधुमक्खी पालन केवल शहद उत्पादन का जरिया नहीं है, बल्कि यह फसलों की उत्पादकता बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाता है। विशेष रूप से सेब और लीची जैसी फसलों में मधुमक्खियों की उपस्थिति से बेहतर पर-परागण होता है, जिससे अधिक पैदावार मिलती है।
सरकार की यह पहल किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने, स्वरोजगार को बढ़ावा देने और राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में मील का पत्थर साबित होगी। इस योजना से किसानों को शहद, मोम और अन्य मधु उत्पादों से अतिरिक्त आमदनी होगी, साथ ही भूमिहीन नवयुवकों और बेरोजगारों के लिए स्वरोजगार के नए अवसर खुलेंगे। कृषि क्षेत्र में सुधार के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी यह कदम सहायक होगा।



