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कांग्रेस की दिग्गज नेता मोहसिना किदवई का निधन: भारतीय राजनीति में एक युग का अंत

भारतीय राजनीति के इतिहास में अपनी एक अमिट छाप छोड़ने वाली, कांग्रेस की वयोवृद्ध नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई का 8 अप्रैल, 2026 को 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया। नोएडा के मेट्रो अस्पताल (Metro Hospital) में उम्र संबंधी बीमारियों के चलते उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। उनके निधन के साथ ही भारतीय राजनीति, विशेषकर उत्तर प्रदेश की सियासत के एक बहुत बड़े और ऐतिहासिक अध्याय का अंत हो गया है।

प्रारंभिक जीवन और राजनीति में प्रवेश
मोहसिना किदवई का जन्म 1 जनवरी, 1932 को हुआ था। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत उत्तर प्रदेश से की थी। जनसेवा के प्रति अपने समर्पण के कारण वे जल्द ही राज्य की राजनीति की मुख्यधारा में आ गईं। 1960 के दशक में उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा में प्रवेश किया और राज्य सरकार में मंत्री पद भी संभाला। उत्तर प्रदेश के जमीनी स्तर पर उनकी पकड़ इतनी मजबूत थी कि उन्हें उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (UPCC) का अध्यक्ष भी नियुक्त किया गया था।

राष्ट्रीय राजनीति और ऐतिहासिक जीत
मोहसिना किदवई को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और बाद में राजीव गांधी के सबसे निष्ठावान और करीबी सहयोगियों में गिना जाता था। जब कांग्रेस पार्टी 1970 के दशक के अंत में अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही थी, तब मोहसिना जी ने एक मजबूत स्तंभ की तरह पार्टी का साथ दिया। 1978 के आज़मगढ़ लोकसभा उपचुनाव में उनकी ऐतिहासिक जीत को भारतीय राजनीति में एक टर्निंग पॉइंट माना जाता है, जिसने इंदिरा गांधी की राजनीतिक वापसी की नींव रखी थी। इसके अलावा, उन्होंने मेरठ सहित अन्य निर्वाचन क्षेत्रों से भी लोकसभा का सफलतापूर्वक प्रतिनिधित्व किया और बाद में वे छत्तीसगढ़ से राज्यसभा की सांसद भी रहीं।

प्रमुख उपलब्धियां और केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्यकाल
मोहसिना किदवई ने अपने लंबे राजनीतिक करियर में केंद्र और संगठन, दोनों स्तरों पर कई महत्वपूर्ण पदों को सुशोभित किया। वे केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री रहीं और उन्होंने स्वास्थ्य, नागरिक उड्डयन, परिवहन और शहरी विकास जैसे कई अत्यंत महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार सफलतापूर्वक संभाला। एक कुशल प्रशासक के रूप में, उन्होंने देश के बुनियादी ढांचे के विकास और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर विशेष जोर दिया।

संगठनात्मक स्तर पर भी उनकी भूमिका अत्यंत प्रभावशाली रही। वे दशकों तक कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की वरिष्ठ सदस्या रहीं और उन्होंने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव के रूप में भी संगठन को मजबूती प्रदान की।

मोहसिना किदवई का जीवन इस बात का उत्कृष्ट प्रमाण है कि एक महिला अपनी नेतृत्व क्षमता, दृढ़ता और राजनीतिक सूझबूझ के बल पर सर्वोच्च शिखर तक कैसे पहुंच सकती है। वे अपनी सौम्यता, सादगी और स्पष्टवादिता के लिए हमेशा जानी जाती थीं। 94 वर्ष की आयु में उनका निधन पूरे देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनके द्वारा किए गए कार्य, उनके आदर्श और भारतीय लोकतंत्र में उनका योगदान भारतीय राजनीतिक इतिहास में हमेशा एक प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

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