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भारतीय रिज़र्व बैंक ने की द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा

( अभिषेक सिंह): भारतीय रिज़र्व बैंक ने आज अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा की है । रिज़र्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने सुबह 10 बजे वित्तीय वर्ष 2026-27 की अपनी पहली बैठक में मौद्रिक नीति समिति द्वारा लिए गए निर्णयों की जानकारी दिया । गवर्नर की अध्यक्षता में गठित छह सदस्यीय समिति ब्याज दरों, मुद्रास्फीति के दृष्टिकोण और विकास अनुमानों जैसे प्रमुख पहलुओं पर विचार-विमर्श कर रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट से मुद्रास्फीति बढ़ने की आशंका को देखते हुए, रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में मानक नीतिगत रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय हुआ है।

आरबीआई मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में लिए गए फैसलों का ऐलान गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कर दिया है। आरबीआई ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। यह 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा है। कमेटी ने यह फैसला सर्वसम्मति से लिया है।इसका मतलब है कि होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन सस्ता होने के लिए अभी और इंतजार करना है। या ईएमआई भी कम होने नहीं होगी।

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण बढ़ी अनिश्चितता का असर इकोनॉमिक आउटलुक पर पड़ रहा है। हेडलाइन मुद्रास्फीति नियंत्रित है और केंद्रीय बैंक के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे है। इस साल के लिए रियल जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.9 पर्सेंट है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया जीडीपी ग्रोथ पहली तिमाही में 6.8%, दूसरी तिमाही में 6.7%, तीसरी तिमाही में 7% और चौथी तिमाही में 7.2% रहने का अनुमान है।

हालांकि, अर्थशास्त्रियों का कहना है कि रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति अभी स्थिति पर नजर रखेगी। अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं और महंगाई बढ़ी, तो आने वाले समय में ब्याज दर बढ़ाई जा सकती है। फिलहाल रिजर्व बैंक महंगाई और आर्थिक वृद्धि दोनों को संतुलित रखने की कोशिश करेगा।

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