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मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर बड़े हमले की तैयारी में ट्रंप, मिडिल ईस्ट भेजा तीसरा कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और 10 हजार सैनिक

Poonam Kumari
October 27, 2026
2 min read
मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर बड़े हमले की तैयारी में ट्रंप, मिडिल ईस्ट भेजा तीसरा कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और 10 हजार सैनिक

विवेक ओझा

वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि आगामी 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनावों के बाद ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को और तेज किया जा सकता है। इसी रणनीति के तहत अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी को अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ाते हुए तीसरा कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और लगभग 10,000 अतिरिक्त सैनिक तैनात करने का फैसला किया है।

क्या है पूरा मामला?

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेंटागन ने ईरान पर संभावित हमले के मद्देनजर यह बड़ी सैन्य तैनाती शुरू की है। इस बल में यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट (USS Theodore Roosevelt) एयरक्राफ्ट कैरियर, यूएसएस मैकिन आइलैंड (USS Makin Island) एम्फीबियस रेडी ग्रुप और 13वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट के जवान शामिल हैं। ये सभी बल नवंबर के अंत तक मिडिल ईस्ट पहुंच जाएंगे, जिससे पहले से तैनात यूएसएस जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश और यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन के साथ मिलकर अमेरिका के पास इस क्षेत्र में तीन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप हो जाएंगे।

ट्रंप का सख्त रुख

राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर ईरान ने परमाणु समझौते को लेकर अमेरिकी शर्तें नहीं मानीं, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। टाइम मैगजीन को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा था कि मिडटर्म चुनावों के बाद ईरान के खिलाफ बमबारी को तेज करना "संभव" है। इसके अलावा, उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह भी चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने "बहुत उचित समझौता" स्वीकार नहीं किया, तो उसका अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा।

ईरान और वैश्विक असर

अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा ईरान के साथ-साथ उसके सहयोगियों को निशाना बनाने और पश्चिम एशिया में नई सैन्य तैनाती के चलते तेल की कीमतों में उछाल देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि इस बढ़ती सैन्य तैनाती से क्षेत्र में एक और बड़े संघर्ष का खतरा बढ़ गया है।

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