'ब्राजील किसी का बैकयार्ड नहीं', राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद लूला डा सिल्वा का ट्रंप पर सीधा वार; कहा- विदेशी दखल को हराया
ब्राजील के राष्ट्रपति लुइस इनासियो लूला डा सिल्वा ने रविवार (25 अक्टूबर, 2026) को हुए रनऑफ चुनाव में शानदार जीत दर्ज करते हुए लगातार चौथी बार राष्ट्रपति पद की शपथ लेने का मन बना लिया है। उन्होंने कंजर्वेटिव उम्मीदवार फ्लेवियो बोल्सोनारो को करीबी मुकाबले में हराया। इस जीत के बाद लूला ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधते हुए साफ कर दिया कि ब्राजील किसी का 'बैकयार्ड' यानी पिछलग्गू नहीं है।

अभिषेक सिंह ब्रासीलिया: ब्राजील के राष्ट्रपति लुइस इनासियो लूला डा सिल्वा ने रविवार (25 अक्टूबर, 2026) को हुए रनऑफ चुनाव में शानदार जीत दर्ज करते हुए लगातार चौथी बार राष्ट्रपति पद की शपथ लेने का मन बना लिया है। उन्होंने कंजर्वेटिव उम्मीदवार फ्लेवियो बोल्सोनारो को करीबी मुकाबले में हराया। इस जीत के बाद लूला ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधते हुए साफ कर दिया कि ब्राजील किसी का 'बैकयार्ड' यानी पिछलग्गू नहीं है।
कांटे की टक्कर में लूला की जीत
ब्राजील के चुनाव आयोग के मुताबिक, लूला को 51.76 प्रतिशत वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी फ्लेवियो बोल्सोनारो को 48.24 प्रतिशत वोट ही मिल पाए। लूला ने करीब 44 लाख वोटों के अंतर से यह चुनाव जीता। यह जीत लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में वामपंथी नेतृत्व को और मजबूती देने वाली है। गौरतलब है कि पहले दौर के चुनाव में फ्लेवियो बोल्सोनारो लूला से आगे चल रहे थे, लेकिन दूसरे दौर में लूला ने शानदार वापसी करते हुए बाजी मार ली।
ट्रंप पर साधा निशाना
अपनी जीत के बाद साओ पाउलो में एक संबोधन के दौरान लूला ने कहा, "ब्राजील किसी का बैकयार्ड नहीं है।" यह बयान सीधे तौर पर इस क्षेत्र में अमेरिका के प्रभाव पर एक कटाक्ष के रूप में देखा जा रहा है। लूला ने आगे कहा कि उनके अभियान ने डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए होने वाले विदेशी दखल का मुकाबला करने में सफलता हासिल की है। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म को विनियमित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
फ्लेवियो बोल्सोनारो कौन हैं?
फ्लेवियो बोल्सोनारो ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो के बेटे और सीनेटर हैं। उन्होंने अपने चुनाव प्रचार में वाशिंगटन के साथ संबंध मजबूत करने और ट्रंप प्रशासन के साथ बेहतर व्यापार समझौता करने का वादा किया था। वहीं, लूला ने अपने प्रचार के दौरान अमेरिकी टैरिफ और ड्रग तस्करी पर वाशिंगटन की नीतियों की आलोचना की थी। फ्लेवियो ने चुनाव परिणाम को रद्द करने की मांग भी की है।
सत्ता में वापसी और जनभागीदारी का वादा
लूला ने 2003 से 2010 तक ब्राजील पर शासन किया था और गरीबी कम करने के अपने रिकॉर्ड के लिए जाने जाते हैं। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वे 215 मिलियन ब्राजीलियाई लोगों के लिए सरकार चलाएंगे और अब चुनावी मतभेदों को भुलाकर सभी को साथ लेकर चलेंगे। उन्होंने कहा, "हम इस देश को चलाने का तरीका बदलेंगे और लोगों को फैसले लेने की प्रक्रिया में ज्यादा हिस्सा लेने के लिए तैयार करेंगे।" लूला ने यह भी कहा कि उनके अभियान ने लोगों को यह समझाने में सफलता पाई है कि ब्राजील में लोकतंत्र की रक्षा के लिए वोटिंग बहुत जरूरी है।
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ब्राजील के सुप्रीम इलेक्टोरल कोर्ट के अनुसार, 98% से अधिक वोटों की गिनती पूरी होने के बाद लूला को 51.75% वोट मिले, जो करीब 6.40 करोड़ वोटों के बराबर है। वहीं, फ्लेवियो बोल्सोनारो को 48.25% वोट मिले, जो करीब 5.90 करोड़ हैं। पहले दौर में पिछड़ने के बाद दूसरे दौर में शानदार वापसी करते हुए लूला ने करीब 44 लाख वोटों के अंतर से यह चुनाव जीता। उनकी जीत में ब्राजील के पूर्वोत्तर राज्यों, अमेज़न, पारा, अमापा और मिनास गेरैस जैसे इलाकों से मिले भारी समर्थन का अहम रोल रहा।
