द इंडियन व्यू

ब्राजील में लूला की ऐतिहासिक वापसी: ट्रंप के करीबी बोल्सोनारो के बेटे को हराया, चौथी बार बने राष्ट्रपति

ब्राजील के सुप्रीम इलेक्टोरल कोर्ट के अनुसार, 98% से अधिक वोटों की गिनती पूरी होने के बाद लूला को 51.75% वोट मिले, जो करीब 6.40 करोड़ वोटों के बराबर है। वहीं, फ्लेवियो बोल्सोनारो को 48.25% वोट मिले, जो करीब 5.90 करोड़ हैं। पहले दौर में पिछड़ने के बाद दूसरे दौर में शानदार वापसी करते हुए लूला ने करीब 44 लाख वोटों के अंतर से यह चुनाव जीता। उनकी जीत में ब्राजील के पूर्वोत्तर राज्यों, अमेज़न, पारा, अमापा और मिनास गेरैस जैसे इलाकों से मिले भारी समर्थन का अहम रोल रहा।

Poonam Kumari
October 26, 2026
3 min read
ब्राजील में लूला की ऐतिहासिक वापसी: ट्रंप के करीबी बोल्सोनारो के बेटे को हराया, चौथी बार बने राष्ट्रपति

विवेक ओझा: साओ पाउलो: ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर के नतीजे सोमवार (26 अक्टूबर, 2026) को घोषित हो गए हैं। 80 वर्षीय वामपंथी नेता और वर्तमान राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ने दक्षिणपंथी उम्मीदवार और पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे फ्लेवियो बोल्सोनारो को करीबी मुकाबले में हराकर ऐतिहासिक जीत हासिल की है। लूला अब लगातार चौथी बार ब्राजील के राष्ट्रपति बनेंगे।

कांटे की टक्कर में लूला की जीत

ब्राजील के सुप्रीम इलेक्टोरल कोर्ट के अनुसार, 98% से अधिक वोटों की गिनती पूरी होने के बाद लूला को 51.75% वोट मिले, जो करीब 6.40 करोड़ वोटों के बराबर है। वहीं, फ्लेवियो बोल्सोनारो को 48.25% वोट मिले, जो करीब 5.90 करोड़ हैं। पहले दौर में पिछड़ने के बाद दूसरे दौर में शानदार वापसी करते हुए लूला ने करीब 44 लाख वोटों के अंतर से यह चुनाव जीता। उनकी जीत में ब्राजील के पूर्वोत्तर राज्यों, अमेज़न, पारा, अमापा और मिनास गेरैस जैसे इलाकों से मिले भारी समर्थन का अहम रोल रहा।

विपक्ष ने नहीं मानी हार

चुनाव परिणाम के बाद फ्लेवियो बोल्सोनारो ने हार स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने चुनाव को "रद्द" करने की मांग करते हुए इसे "अस्वीकार्य" बताया। उन्होंने दावा किया कि सार्वजनिक परिवहन की समस्या के कारण कुछ मतदान केंद्रों पर मतदान का समय बढ़ाया गया था, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठता है। उनके वकीलों ने चुनाव को रद्द करने के लिए अदालत में याचिका दायर करने की बात कही है।

लूला की नई सरकार की प्राथमिकताएं

लूला के चौथे कार्यकाल की शुरुआत 5 जनवरी, 2027 से होगी। अपने चुनाव प्रचार के दौरान लूला ने जो वादे किए हैं, उनके आधार पर उनकी सरकार की मुख्य प्राथमिकताएं इस प्रकार होंगी:

* अर्थव्यवस्था: न्यूनतम मजदूरी में महंगाई दर से अधिक बढ़ोतरी करना। साथ ही, स्कूल छोड़ने की दर को कम करने के लिए 'पे-डी-मेइया' (Pé-de-Meia) शिक्षा योजना का नया संस्करण लॉन्च करना।

* लोक सुरक्षा: देश में बढ़ते अपराधों को देखते हुए एक नया सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रालय (Public Security Ministry) बनाना, ताकि संघीय सरकार की भूमिका बढ़ाई जा सके।

* स्वास्थ्य: कैंसर के इलाज के लिए दुनिया का सबसे बड़ा सार्वजनिक नेटवर्क स्थापित करना और कीमोथेरेपी तथा इम्यूनोथेरेपी दवाओं तक लोगों की पहुंच आसान बनाना।

* विदेश नीति: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ चल रहे टैरिफ विवाद के बीच लूला ने सभी देशों के साथ समान और स्वतंत्र कूटनीतिक संबंध बनाए रखने का संकल्प लिया है।

वैश्विक स्तर पर क्या हैं मायने?

लूला की यह जीत लैटिन अमेरिका में वामपंथी ताकतों के लिए एक बड़ी राहत और मजबूती के रूप में देखी जा रही है। वहीं, डोनाल्ड ट्रंप और उनके समर्थकों के लिए यह एक करारा झटका है, जो लगातार यह दावा कर रहे थे कि लैटिन अमेरिका दक्षिणपंथ की ओर लौट रहा है। माना जा रहा है कि लूला के नेतृत्व में ब्राजील वैश्विक मंच पर अमेरिका से दूरी बनाते हुए बहुपक्षीय संबंधों और विकासशील देशों के पक्ष में अपनी आवाज और मजबूती से उठाएगा।

इस खबर को लाइक और शेयर करें

सम्बंधित ख़बरें

लिकटेंस्टीन प्रिंस एलोइस राजकीय दौरे पर पहुंचे मुंबई

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, “भारत में लिकटेंस्टीन के हेरेडिटरी प्रिंस एलोइस का स्वागत है। वो भारत की राजकीय यात्रा पर मुंबई पहुंचे। महाराष्ट्र सरकार के प्रोटोकॉल मंत्री, जयकुमार रावल ने उनका स्वागत किया।”

नेतन्याहू ने शेयर की AI तस्वीर, तेल अवीव में परमाणु हमले की दी धमकी; बोले- ईरान से 'दूसरा होलोकॉस्ट' का खतरा

नेतन्याहू ने यह तस्वीर दक्षिणपंथी कार्यकर्ता युवल ब्लूमबर्ग के एक बयान के साथ साझा की है। पोस्ट में कहा गया है कि इजराइल एक "वास्तविक और मूर्त अस्तित्वगत खतरे" का सामना कर रहा है। पोस्ट में लिखा है, "अगर ईरानियों को परमाणु हथियार मिल गए, तो फिर कुछ और मायने नहीं रखेगा।" इसमें यह भी दावा किया गया है कि सरकार के चारों ओर चल रहे विवाद, जिनमें कतरगेट मामला और अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स ड्राफ्ट से जुड़े मुद्दे शामिल हैं, सिर्फ "एक बड़ा धुआं" हैं, जो असली मुद्दे को छिपाने के लिए हैं। पोस्ट में सवाल उठाया गया है, "अगर मध्य इजराइल पर दो परमाणु बम गिराए जाते हैं, तो इन सभी बेतुके विवादों की परवाह कौन करेगा?"

'ब्राजील किसी का बैकयार्ड नहीं', राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद लूला डा सिल्वा का ट्रंप पर सीधा वार; कहा- विदेशी दखल को हराया

ब्राजील के राष्ट्रपति लुइस इनासियो लूला डा सिल्वा ने रविवार (25 अक्टूबर, 2026) को हुए रनऑफ चुनाव में शानदार जीत दर्ज करते हुए लगातार चौथी बार राष्ट्रपति पद की शपथ लेने का मन बना लिया है। उन्होंने कंजर्वेटिव उम्मीदवार फ्लेवियो बोल्सोनारो को करीबी मुकाबले में हराया। इस जीत के बाद लूला ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधते हुए साफ कर दिया कि ब्राजील किसी का 'बैकयार्ड' यानी पिछलग्गू नहीं है।