ट्रंप ने H-1B वीजा छूट को समाप्त करने की दिशा में बढ़ाया कदम, भारतीय टेक पेशेवरों पर मंडराया खतरा; हर एक्सटेंशन पर फिर से जांच की तैयारी

विवेक ओझा
वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन ने H-1B वीजा एक्सटेंशन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण नीति को खत्म करने का प्रस्ताव रखा है। इसे "डिफरेंस टू प्रायर अप्रूवल्स" (Deference to Prior Approvals) के नाम से जाना जाता है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो ग्रीन कार्ड के लंबे इंतजार में फंसे भारतीय पेशेवरों के लिए अनिश्चितता काफी बढ़ सकती है।
क्या है डिफरेंस पॉलिसी?
अभी तक अमेरिकी नागरिकता और इमिग्रेशन सेवाएं (USCIS) जब किसी एक्सटेंशन याचिका की समीक्षा करती हैं, जिसमें नियोक्ता, कर्मचारी और तथ्य पहले जैसे ही हों, तो वह पहले के मंजूरी वाले फैसले को महत्व देती हैं। सिर्फ खास परिस्थितियों, जैसे गंभीर गलती, बदलाव या नई जानकारी होने पर ही इसे नजरअंदाज किया जा सकता है। प्रस्तावित बदलाव के तहत अधिकारी पहले के फैसले को मानने के लिए बाध्य नहीं रहेंगे और हर एक्सटेंशन याचिका को नए सिरे से जांचा जा सकेगा। यह प्रस्ताव 14 अक्टूबर, 2026 को प्रकाशित हुआ है और अभी अंतिम नियम नहीं बना है।
भारतीय पेशेवरों पर क्या होगा असर?
भारतीय H-1B होल्डर्स इस बदलाव से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। USCIS के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में कुल H-1B लाभार्थियों में भारतीयों की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत थी। नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी के विश्लेषण के मुताबिक, लगभग 10 लाख भारतीय रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड बैकलॉग में फंसे हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से H-1B एक्सटेंशन के दौरान पहले से अधिक सख्त जांच होगी। हर रिन्यूअल पर विशेषज्ञता वाले पेशे, वेतन स्तर और नियोक्ता के साथ संबंध जैसे मुद्दों को फिर से खोला जा सकता है, जिससे प्रोसेसिंग का समय बढ़ सकता है और रिफ्यूजल (अस्वीकृति) की संभावना बढ़ सकती है।
2017 में भी हुआ था असर
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप प्रशासन ने इस नीति को बदलने की कोशिश की है। 2017 में पहले ट्रंप प्रशासन ने इस नीति को रद्द कर दिया था, जिसके बाद H-1B एक्सटेंशन के रिफ्यूजल की दर 3.5 प्रतिशत से बढ़कर 24 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। 2021 में बाइडन प्रशासन ने इसे बहाल किया था और 2024 में इसे नियमों में शामिल किया गया था। अब ट्रंप प्रशासन तीसरी बार इसे खत्म करने की कोशिश कर रहा है।
सार्वजनिक टिप्पणियों की प्रक्रिया
यह प्रस्ताव अभी अंतिम नियम नहीं है। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) 13 नवंबर, 2026 तक इस पर सार्वजनिक टिप्पणियां स्वीकार कर रहा है। इसके बाद ही इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। अगर यह नियम लागू होता है, तो अमेरिका में काम कर रहे हजारों भारतीय टेक पेशेवरों और उनके परिवारों के भविष्य पर गहरा असर पड़ सकता है।
