इजरायल में चली जाएगी बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता? एग्जिट पोल में विपक्ष को बढ़त, लेकिन किसी को नहीं मिला बहुमत

विवेक ओझा
तेल अवीव: इजरायल में मंगलवार (27 अक्टूबर, 2026) को हुए आम चुनाव के बाद जारी एग्जिट पोल के नतीजों ने एक बार फिर से राजनीतिक अनिश्चितता पैदा कर दी है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले दक्षिणपंथी गठबंधन को विपक्षी गठबंधन ने मामूली बढ़त हासिल की है, लेकिन किसी भी पक्ष को सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों का बहुमत नहीं मिला है।
सीटों का गणित
इजरायली टीवी चैनलों के एग्जिट पोल के मुताबिक, पूर्व सैन्य प्रमुख गैडी आइजनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 52 से 53 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन को लगभग 50 सीटें मिल रही हैं। 120 सदस्यीय संसद (नेसेट) में बहुमत के लिए 61 सीटें जरूरी हैं। अरब पार्टियों ने 17 से 18 सीटें जीतकर रिकॉर्ड प्रदर्शन किया है, जो सरकार बनाने में निर्णायक साबित हो सकती हैं।
अरब पार्टियों की भूमिका अहम
एग्जिट पोल के नतीजों ने साफ कर दिया है कि अरब पार्टियां 'किंगमेकर' की भूमिका निभा सकती हैं। हालांकि, आइजनकोट ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वे अरब सांसदों के साथ मिलकर सरकार नहीं बनाएंगे, लेकिन अरब सांसद बाहर से समर्थन देकर एक अल्पमत सरकार बनाने में मदद कर सकते हैं। वहीं, नेतन्याहू ने चुनाव प्रचार के दौरान अरब मतदाताओं को लेकर चेतावनी दी थी।
नेतन्याहू का रुख
नेतन्याहू ने खुद को इजरायल का सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाला प्रधानमंत्री बताते हुए सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख का वादा किया था। एग्जिट पोल के नतीजों के बाद नेतन्याहू के सहयोगी और विदेश मंत्री गिडोन सार ने विपक्ष की जीत के दावों को 'समय से पहले' बताया है। वहीं, आइजनकोट ने कहा कि नतीजे नेतन्याहू और 7 अक्टूबर की सरकार पर 'पूरी तरह से अविश्वास' को दर्शाते हैं। उन्होंने समर्थकों से 'नई आशा के युग' का वादा किया है।
मतदान प्रतिशत ने बनाया रिकॉर्ड
इस चुनाव में मतदान प्रतिशत 1999 के बाद सबसे अधिक रहा है। मतदान प्रतिशत लगभग 77.7% दर्ज किया गया। यह चुनाव 7 अक्टूबर, 2023 के हमलों के बाद पहला राष्ट्रीय चुनाव था, इसलिए इसे नेतन्याहू के युद्धकालीन नेतृत्व पर जनमत संग्रह के रूप में भी देखा जा रहा है।
आगे की राह
अब सभी की निगाहें आधिकारिक नतीजों पर टिकी हैं। आधिकारिक नतीजे 28 या 29 अक्टूबर को आने की उम्मीद है, जिसके बाद गठबंधन की बातचीत शुरू होगी। अगर किसी भी पक्ष को बहुमत नहीं मिलता है, तो इजरायल फिर से नए चुनाव की ओर बढ़ सकता है। नेतन्याहू के लिए यह चुनाव और भी अहम है, क्योंकि उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले चल रहे हैं और अगर वे सत्ता में नहीं आते हैं, तो उन्हें जेल भी हो सकती है।
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