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ट्रम्प-ईरान कूटनीति पर वाशिंगटन में सरगर्मी

सैन्य हमला टलने के बाद सीनेट में हुई गुप्त ब्रीफिंग

अभिषेक सिंह/ वाशिंगटन / नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिली है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान पर एक संभावित और विनाशकारी सैन्य हमले को अंतिम समय में टालने के बाद, वाशिंगटन में अमेरिकी सीनेट की एक बेहद महत्वपूर्ण और बंद कमरे में (Closed-door) ब्रीफिंग आयोजित की गई। इस ब्रीफिंग का मुख्य उद्देश्य सीनेटरों और शीर्ष सांसदों को प्रशासन की भविष्य की कूटनीतिक रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के पहलुओं से अवगत कराना था।

व्हाइट हाउस और पेंटागन के शीर्ष अधिकारियों ने सीनेट को बताया कि ईरान के साथ एक बड़े युद्ध को टालने का निर्णय एक ‘रणनीतिक विराम’ है, न कि कमजोरी का संकेत। अधिकारियों ने तर्क दिया कि सैन्य हमले की बजाय ईरान को एक नए और कड़े परमाणु समझौते (Nuclear Deal) के लिए वार्ता की मेज पर वापस लाना अमेरिका की प्राथमिकता है। हालांकि, सीनेट के कुछ कट्टपंथी सदस्यों ने हमले को रद्द करने के फैसले पर निराशा व्यक्त की और कहा कि इससे ईरान को अपने छद्म गुटों (Proxy Groups) को और अधिक मजबूत करने का समय मिल जाएगा।

दूसरी ओर, इस ब्रीफिंग के दौरान यूरोपीय सहयोगियों और इजरायल के साथ समन्वय को लेकर भी चर्चा हुई। डेमोक्रेट सांसदों ने प्रशासन के इस कदम का सतर्कतापूर्वक स्वागत करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में एक और युद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए विनाशकारी साबित होता। कूटनीतिक हलकों का मानना है कि अमेरिका अब ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंधों (Sanctions) का नया दौर लागू कर सकता है, ताकि उसे बिना गोली चलाए अपनी शर्तों पर झुकने के लिए मजबूर किया जा सके।

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