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अवैध खनन पर योगी सरकार का डिजिटल प्रहार, 1.53 लाख वाहनों पर लगे माइन टैग; AI से हो रही ट्रैकिंग

लखनऊ ( राघवेंद्र प्रताप सिंह) : प्रदेश में अवैध खनन, परिवहन पर नियंत्रण के लिए भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग ने प्रतिदिन 70 से 75 लोगों को ई-नोटिस जारी किया। नौ साल में यह संख्या 2.41 लाख तक पहुंच गयी है। इनसे 756 करोड़ रुपये बतौर जुर्माना वसूला गया। खनन क्षेत्रों में जियो-फेंसिंग, कैमरा युक्त वे-ब्रिज, रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआइडी) के बाद अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित 62 चेकगेट लग गए हैं। दो चेकगेट निर्माणाधीन हैं, जिससे अवैध खनन की चेकिंग हो रही है।

भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की सचिव एवं निदेशक माला श्रीवास्तव ने बताया कि आईएमपीएस ( एकीकृत खनन परमिट प्रणाली) के अंतर्गत खनन क्षेत्रों की जियो-फेंसिंग, कैमरा युक्त वे-ब्रिज, माइन टैग, विभिन्न राजमार्गों पर आइओटी का उपयोग किया जा रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित चेकगेट को लखनऊ स्थित कमांड सेंटर से एकीकृत किया गया है, जहां से पूरे राज्य की गतिविधियों की निगरानी होती है।

भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की सचिव व निदेशक माला श्रीवास्तव ने बताया कि प्रदेश में 75 आरएफआइडी रीडर और एम-चेक एप की सहायता से निगरानी व्यवस्था सुदृढ़ की गयी है। अब तक 1.53 लाख से अधिक वाहनों पर आरएफआइडी माइन टैग लगाए गए हैं, जिससे खनिज परिवहन ऑनलाइन ट्रैकिंग हो रही है। श्रीवास्तव ने बताया कि खनन नीति 2017 के तहत एकीकृत निगरानी तंत्र लागू किया गया।

16 जुलाई 2026 तक आईएमएसएस (एकीकृत खनन निगरानी तंत्र) के माध्यम से 2.41 लाख से अधिक ई-नोटिस जारी हुए हैं। ई-नोटिसों पर 998 करोड़ रुपये बतौर जुर्माना निर्धारित की गई है। इसमें से करीब 756 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली जा चुकी है। इससे योगी सरकार की तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था अवैध खनन व खनिज परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के साथ-साथ सरकारी राजस्व बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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