‘थर्ड मुंबई’ बुनियादी ढांचा परियोजना पर फिर छिड़ा विवाद
भूमि अधिग्रहण और विस्थापन को लेकर स्थानीय किसानों का विरोध तेज

राघवेन्द्र प्रताप सिंह/ मुंबई / नवी मुंबई: महाराष्ट्र सरकार की ड्रीम प्रोजेक्ट मानी जा रही ‘थर्ड मुंबई’ (Karnala-Sai-Chirner New City) बुनियादी ढांचा परियोजना को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। अटल सेतु (MTHL) और नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास विकसित की जा रही इस नई मेगा सिटी योजना के खिलाफ स्थानीय भूमि स्वामियों, किसानों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोल दिया है। एमएमआरडीए (MMRDA) द्वारा लगभग 300 से अधिक गांवों की उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होते ही स्थानीय संघर्ष एक बार फिर सतह पर आ गया है।
स्थानीय किसान संघर्ष समिति ने रायगढ़ और नवी मुंबई क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन करते हुए आरोप लगाया है कि सरकार बिल्डरों और कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए किसानों की पुश्तैनी जमीनों को औने-पौने दामों में छीन रही है। किसानों का कहना है कि न तो उन्हें मुआवजा दर (Compensation Rate) स्पष्ट की गई है और न ही उनके पुनर्वास (Rehabilitation Policy) का कोई पारदर्शी खाका पेश किया गया है। इसके अलावा, पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि पश्चिमी घाट और मैंग्रोव जंगलों से सटे इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कंक्रीट का जंगल खड़ा करने से तटीय पारिस्थितिकी तंत्र (Coastal Ecosystem) तबाह हो जाएगा।
दूसरी ओर, राज्य सरकार और एमएमआरडीए अधिकारियों का तर्क है कि ‘थर्ड मुंबई’ का निर्माण मुंबई पर जनसंख्या के दबाव को कम करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर का बिजनेस व रेजिडेंशियल हब बनाने के लिए बेहद जरूरी है। सरकार का दावा है कि भूमि अधिग्रहण सहमति मॉडल के आधार पर ही किया जाएगा और प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाएगा। हालांकि, जमीनी स्तर पर बढ़ते असंतोष को देखते हुए परियोजना की समयसीमा पिछड़ने की पूरी आशंका जताई जा रही है।



