लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026 पेश

नई दिल्ली : विपक्षी दलों के सांसदों के हंगामे और नारेबाजी के बीच केंद्र सरकार ने सोमवार को लोकसभा में “सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026” पेश किया। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन में विधेयक प्रस्तुत किया। विपक्ष के लगातार विरोध और शोर-शराबे के कारण लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी। राज्यसभा की कार्यवाही भी इसी समय तक स्थगित रही।
सुबह 11 बजे दोनों सदनों की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। लगातार हंगामे के कारण पहले लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित की गई। दोपहर 12 बजे कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी गतिरोध बना रहा, जिसके बाद दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
सरकार ने वर्ष 2024 में बने कानून में संशोधन के लिए यह विधेयक पेश किया है। प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक के आरोपितों के लिए अधिक कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। साथ ही राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें गठित करने का अधिकार देने का प्रस्ताव है, जहां ऐसे मामलों की प्रतिदिन सुनवाई होगी। यह कानून केंद्र सरकार और उसकी एजेंसियों द्वारा आयोजित सार्वजनिक परीक्षाओं पर लागू होगा। इसके दायरे में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी), कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी), रेलवे भर्ती, बैंकिंग भर्ती परीक्षाएं, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) तथा अन्य केंद्रीय भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाएं शामिल होंगी।
सरकार का कहना है कि यह संशोधन नीट पेपर लीक विवाद और उसके बाद देशभर में हुए छात्र आंदोलनों के मद्देनजर लाया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 23 जुलाई को कानून को और सख्त बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स गठित करने की भी घोषणा की गई।
इस बीच पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा देने के बाद पहली बार संसद पहुंचे। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सांसदों ने उनका शॉल और मिथिला पाग पहनाकर स्वागत किया तथा उन्हें संसद भवन के भीतर तक लेकर गए। इस दौरान सांसदों ने ‘धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद’ के नारे भी लगाए। नीट पेपर लीक विवाद के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दिया था।
उल्लेखनीय है कि तीन मई, 2026 को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने के बाद परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित करनी पड़ी थी। इस मामले को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए। मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कर रही है। अब तक 13 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है और एजेंसी जल्द ही आरोपपत्र दाखिल कर सकती है।



