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एथलीट्स विलेज नहीं, फिर भी बरकरार टीम भावना; ग्लासगो मॉडल की भारतीय दल ने की सराहना

ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में इस बार पारंपरिक एथलीट्स विलेज की जगह खिलाड़ियों को तीन अलग-अलग होटलों में ठहराया गया है। भारतीय खिलाड़ियों ने इस नई व्यवस्था को सकारात्मक बताते हुए कहा है कि इससे उन्हें बेहतर सुविधाएं, कम यात्रा समय और प्रतियोगिता की तैयारी के लिए अधिक समय मिल रहा है, जबकि टीम भावना और आपसी तालमेल भी पूरी तरह बरकरार है।

भारतीय ओलंपिक संघ ने रविवार को एक बयान में कहा कि भारतीय दल ने इस नए मॉडल को तेजी से अपनाया है। भारतीय दल के खिलाड़ी मानते हैं कि तीन अलग-अलग होटलों में ठहरने के बावजूद आपसी मेलजोल और टीम भावना पर कोई असर नहीं पड़ा है। सभी होटल एक ही क्षेत्र में स्थित होने के कारण खिलाड़ी नियमित रूप से एक-दूसरे से मिलते रहते हैं, जिससे बहु-खेल प्रतियोगिताओं वाला माहौल बरकरार है।

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असम की लॉन बॉल्स खिलाड़ी पुतुल सोनोवाल ने कहा कि यह व्यवस्था उम्मीद से कहीं बेहतर साबित हुई है। उनके अनुसार, प्रतियोगिता स्थलों तक पहुंचने में बहुत कम समय लगता है, जिससे समय की बचत होती है और यह भविष्य के खेलों के लिए भी एक अच्छा मॉडल बन सकता है।

डेकाथलॉन खिलाड़ी तेजस्विन शंकर ने कहा कि होटल में ठहरना शुरुआत में अलग अनुभव था, लेकिन पूरी व्यवस्था बेहद सुव्यवस्थित है। प्रतियोगिता स्थल नजदीक हैं, भोजन की गुणवत्ता अच्छी है और इससे खिलाड़ी पूरी तरह अपने प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित कर पा रहे हैं।

भारतीय मुक्केबाज प्रीति पवार ने कहा कि व्यस्त कार्यक्रम के बीच प्रतियोगिता स्थलों की नजदीकी खिलाड़ियों के लिए काफी मददगार है। होटल में आराम और रिकवरी की बेहतरीन सुविधाएं उपलब्ध हैं तथा ग्लासगो का वातावरण भी खिलाड़ियों को पसंद आ रहा है।

भारोत्तोलक निरुपमा देवी ने भोजन, रिकवरी सुविधाओं और फिजियोथेरेपिस्ट की उपलब्धता की सराहना करते हुए कहा कि खिलाड़ियों की हर जरूरत का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।

भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष डॉ. पीटी उषा ने कहा कि हर खेलों का अपना अलग स्वरूप होता है और ग्लासगो ने साबित किया है कि खिलाड़ियों का कल्याण किसी बड़े एथलीट्स विलेज पर नहीं, बल्कि बेहतर योजना और प्रभावी सहयोग व्यवस्था पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि भारतीय खिलाड़ी इस नई व्यवस्था में पूरी तरह सहज हैं और अपना पूरा ध्यान प्रतियोगिताओं पर लगा रहे हैं।

आईओए के अनुसार, भारतीय दल के लिए बनाए गए तीनों होटल उच्च प्रदर्शन केंद्र के रूप में कार्य कर रहे हैं, जहां चिकित्सक, फिजियोथेरेपिस्ट, कोच और टीम प्रबंधक लगातार खिलाड़ियों के साथ मौजूद हैं। प्रतियोगिता स्थलों तक कम दूरी होने से खिलाड़ियों को तैयारी और रिकवरी के लिए अधिक समय मिल रहा है, जिससे उनका पूरा ध्यान केवल प्रदर्शन पर केंद्रित है।

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