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संशोधित झरिया मास्टर प्लान के तहत कौशल विकास (Skill Development) को बढ़ावा देने के लिए आज अहम समझौता ज्ञापन (MoU) पर मुहर लगेगी

इंडियन व्यू टीम/ नई दिल्ली / धनबाद: झारखंड के धनबाद जिले में स्थित ऐतिहासिक झरिया कोयला क्षेत्र (Jharia Coalfield) में दशकों से धधक रही भूमिगत आग (Underground Fire) से प्रभावित परिवारों के स्थायी पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए भारत सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। ‘संशोधित झरिया मास्टर प्लान’ (RJMP) के तहत विस्थापित होने वाले स्थानीय युवाओं और महिलाओं को आजीविका के नए साधन प्रदान करने के लिए आज नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण ‘कौशल विकास समझौता ज्ञापन’ (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

भूमिगत आग और विस्थापन की चुनौती

झरिया कोयला क्षेत्र में पिछले 100 से अधिक वर्षों से खदानों के भीतर आग लगी हुई है, जिससे जमीन धंसने और जहरीली गैसों के रिसाव का खतरा हमेशा बना रहता है। इस गंभीर खतरे से निपटने के लिए सरकार वहां रहने वाले हजारों परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित (Relocate) कर रही है। हालांकि, केवल नया घर देना काफी नहीं है; विस्थापित परिवारों को अपने पारंपरिक रोजगार खोने के बाद जीवन यापन के लिए नए कौशलों की आवश्यकता है।

कौशल विकास और रोजगार सृजन

आज होने वाले इस समझौते के तहत कोयला मंत्रालय, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) और राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) आपस में हाथ मिला रहे हैं। झरिया के युवाओं को ऑटोमोटिव, कंस्ट्रक्शन, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर एनर्जी, ब्यूटी एंड वेलनेस, और सिलाई-कढ़ाई जैसे विभिन्न क्षेत्रों में मुफ्त तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण (Vocational Training) दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्हें बैंकों से लोन और नौकरियों में मदद भी दी जाएगी।

समावेशी पुनर्वास का नया मॉडल

इंडियन व्यू टीम के अनुसार, यह समझौता ‘झरिया मास्टर प्लान 2.0’ का एक बेहद संवेदनशील और मानवीय पहलू है। सरकार का लक्ष्य केवल क्षेत्र खाली कराना नहीं है, बल्कि विस्थापित परिवारों का सामाजिक और आर्थिक पुनरुत्थान करना है। इस योजना के क्रियान्वयन से झरिया के हजारों युवाओं को अपराध या अनिश्चितता के रास्ते से हटाकर देश के मुख्यधारा के विकास से जोड़ा जा सकेगा। यह पहल देश के अन्य पुनर्वास प्रोजेक्ट्स के लिए भी एक रोल मॉडल साबित होगी।

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