केंद्र सरकार ने किया स्पष्ट: इक्विटी (शेयर बाजार) पर लगने वाले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स को खत्म करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं

पल्लवी श्रीवास्तव/ नई दिल्ली: शेयर बाजार के निवेशकों के बीच पिछले कई दिनों से चल रही अफवाहों और अटकलों पर पूर्ण विराम लगाते हुए, केंद्र सरकार ने आधिकारिक रूप से स्पष्ट कर दिया है कि इक्विटी शेयरों या इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड्स पर लगने वाले ‘लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन’ (LTCG) टैक्स को खत्म करने का फिलहाल कोई विचार या प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन नहीं है। यह स्पष्टीकरण वित्त मंत्रालय द्वारा संसद के मॉनसून सत्र के दौरान एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दिया गया है।
क्यों उड़ी थी LTCG टैक्स खत्म होने की अफवाह?
शेयर बाजार (Stock Market) जब अपने सर्वकालिक उच्चतम स्तर (All-Time High) पर कारोबार कर रहा है, तब खुदरा निवेशकों (Retail Investors) और बाजार विश्लेषकों के बीच यह चर्चा तेज हो गई थी कि सरकार आगामी बजट या नीतियों में निवेश को और अधिक बढ़ावा देने के लिए LTCG टैक्स में छूट दे सकती है या इसे पूरी तरह समाप्त कर सकती है। वर्तमान नियमों के अनुसार, यदि कोई निवेशक एक साल से अधिक समय तक शेयर होल्ड करने के बाद उन्हें बेचता है और उसका मुनाफा 1 लाख रुपये से अधिक होता है, तो उसे उस मुनाफे पर 10% की दर से लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स चुकाना होता है।
सरकार का तर्क: राजस्व और समानता
वित्त मंत्रालय ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि LTCG टैक्स भारतीय कर प्रणाली (Tax System) में समानता (Parity) लाने के लिए वर्ष 2018 में दोबारा पेश किया गया था। सरकार का तर्क है कि जब देश का एक आम वेतनभोगी वर्ग (Salaried Class) अपनी आय पर इनकम टैक्स चुकाता है, तो शेयर बाजार से होने वाली भारी कमाई को पूरी तरह से कर-मुक्त (Tax-Free) रखना न्यायसंगत नहीं है। इसके अलावा, यह टैक्स सरकार के लिए राजस्व (Revenue) का एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण स्रोत बन चुका है, जिसका उपयोग देश के बुनियादी ढांचे के विकास (Infrastructure Development) और कल्याणकारी योजनाओं में किया जाता है।
बाजार पर प्रभाव
सरकार के इस स्पष्टीकरण के बाद शेयर बाजार में थोड़ी निराशा जरूर देखी गई, क्योंकि कई बड़े निवेशक कर राहत की उम्मीद लगाए बैठे थे। हालांकि, आर्थिक जानकारों का कहना है कि 10% का LTCG टैक्स वैश्विक मानकों के हिसाब से अभी भी काफी कम है। सरकार की नीतियां कर स्थिरता (Tax Stability) पर केंद्रित हैं, जो विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) को एक स्पष्ट संदेश देती हैं कि भारत की कर नीतियां पारदर्शी और पूर्वानुमानित (Predictable) हैं।



