ब्रिक्स स्वास्थ्य ट्रैक: भारत ने ‘स्वस्थ जीवन शैली’ और ‘मानसिक कल्याण को बढ़ावा’ देने के दो नए एजेंडे इस वैश्विक बैठक में शामिल किए

विवेक ओझा/ चंडीगढ़ / नई दिल्ली: चंडीगढ़ में आयोजित 16वीं ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक के दौरान भारत ने पारंपरिक वैश्विक स्वास्थ्य चर्चाओं से आगे बढ़कर दो नए और दूरदर्शी विषयों को आधिकारिक एजेंडे में शामिल कराया है। भारत के प्रस्ताव पर, ब्रिक्स ‘हेल्थ ट्रैक’ में अब ‘स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा’ (Promoting Healthy Lifestyle) और ‘मानसिक कल्याण’ (Mental Wellbeing) को प्राथमिक स्तंभों के रूप में स्वीकार कर लिया गया है। भारत के इस कदम को वैश्विक स्वास्थ्य नीतियों में एक बड़े विचारशील बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
आयुष और पारंपरिक चिकित्सा का समावेश
‘स्वस्थ जीवन शैली’ के एजेंडे के तहत भारत ने योग, आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों (AYUSH) को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ एकीकृत करने का मॉडल प्रस्तुत किया है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने इस बात पर जोर दिया कि केवल बीमारियों के इलाज (Curative Care) पर ध्यान देने के बजाय निवारक स्वास्थ्य सेवा (Preventive Healthcare) और जीवनशैली में बदलाव पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इससे गैर-संक्रामक रोगों (NCDs) जैसे डायबिटीज, हाइपरटेंशन और हृदय रोगों के वैश्विक बोझ को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) पर वैश्विक ध्यान
दूसरे महत्वपूर्ण एजेंडे के रूप में, भारत ने आधुनिक जीवन की भागदौड़ और महामारी के बाद उत्पन्न हुए मानसिक स्वास्थ्य संकट पर ध्यान आकर्षित किया। भारत ने अपने राष्ट्रीय डिजिटल मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम ‘टेली-मानस’ (Tele-MANAS) की सफलता को ब्रिक्स देशों के सामने साझा किया। इस पहल का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों (Stigma) को दूर करना, डिजिटल काउंसलिंग सेवाओं का विस्तार करना और युवाओं तथा कार्यस्थल पर कर्मचारियों के मानसिक कल्याण के लिए नीतियां बनाना है।
ब्रिक्स देशों का समर्थन
ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका सहित नए सदस्य देशों ने भारत के इन दोनों प्रस्तावों का पुरजोर समर्थन किया है। सदस्य देशों ने माना कि स्वास्थ्य का अर्थ केवल शारीरिक बीमारी की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि यह शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कल्याण की एक पूर्ण स्थिति है। भारत के इस नेतृत्व ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह दुनिया को स्वास्थ्य के प्रति एक समग्र और समावेशी दृष्टिकोण देने में सक्षम है।



