नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) का दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन: जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस दिलाने की मांग को लेकर निकाला मार्च

राघवेंद्र प्रताप सिंह/ नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर की राजनीति में पूर्ण राज्य के दर्जे (Full Statehood) की मांग को लेकर हलचल एक बार फिर अपने चरम पर पहुंच गई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के झंडे तले दर्जनों विधायकों, वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को देश की राजधानी नई दिल्ली में एक विशाल विरोध मार्च निकाला। जंतर-मंतर से शुरू होकर संसद भवन की ओर बढ़ रहे इस मार्च के जरिए नेशनल कॉन्फ्रेंस ने केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर को तुरंत पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने और लोकतांत्रिक शक्तियों को राज्य सरकार को सौंपने की जोरदार मांग की।
‘चुनी हुई सरकार को मिले पूरे अधिकार’
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि 2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किए जाने के बाद से जम्मू-कश्मीर की जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। नेताओं का कहना था कि, “हाल ही में हुए चुनावों में जनता ने एक नई सरकार को चुना है, लेकिन केंद्र शासित प्रदेश (UT) का ढांचा होने के कारण मुख्य उपराज्यपाल (LG) के पास ही सभी शक्तियां केंद्रित हैं। एक चुनी हुई सरकार बिना पूर्ण अधिकारों के जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर सकती।”
संसद के मॉनसून सत्र पर प्रभाव
चूंकि दिल्ली में संसद का मॉनसून सत्र चल रहा है, इसलिए नेशनल कॉन्फ्रेंस के इस प्रदर्शन को अन्य विपक्षी दलों (INDIA Bloc) का भी व्यापक समर्थन मिला। कांग्रेस, सपा और वामपंथी दलों के कई सांसद जंतर-मंतर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता दिखाई। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार देश के एकमात्र मुस्लिम बहुल पूर्व राज्य के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन कर रही है और विधानसभा चुनावों के बाद भी पूर्ण राज्य का दर्जा न देना संसदीय वादों का उल्लंघन है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे और प्रदर्शनकारियों को बैरिकेडिंग लगाकर संसद मार्ग से पहले ही रोक दिया। बाद में नेशनल कॉन्फ्रेंस के एक प्रतिनिधिमंडल को गृह मंत्रालय के अधिकारियों से मिलने की अनुमति दी गई, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। गृह मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि सरकार उपयुक्त समय पर और सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के बाद ही पूर्ण राज्य का दर्जा देने के अपने वादे पर आगे बढ़ेगी।

