मतदाता पंजीकरण में अब नहीं चलेगा कोई फर्जीवाड़ा: चुनाव आयोग ने नए वोटर्स के लिए फॉर्म-6 में किया बड़ा संशोधन, प्रक्रिया हुई और पारदर्शी

पल्लवी श्रीवास्तव/ नई दिल्ली: देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, सटीक और तकनीक-उन्मुख बनाने की दिशा में भारत के चुनाव आयोग (Election Commission of India – ECI) ने एक बड़ा कदम उठाया है। आगामी विधानसभा और आम चुनावों को ध्यान में रखते हुए, चुनाव आयोग ने नए मतदाताओं के पंजीकरण (Voter Registration) के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘फॉर्म-6’ (Form-6) में कई महत्वपूर्ण और कड़े संशोधन किए हैं। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची (Electoral Roll) से फर्जी नामों को पूरी तरह से हटाना और युवा मतदाताओं के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाना है।
क्या-क्या हुए हैं नए बदलाव?
अब तक फॉर्म-6 का प्रारूप काफी पुराना था, जिसमें दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर कई तकनीकी खामियां रह जाती थीं। नए संशोधित फॉर्म-6 में निम्नलिखित प्रमुख बदलाव किए गए हैं:
- 1. सटीक आवासीय प्रमाण: अब नए मतदाताओं को अपने स्थायी और वर्तमान पते का स्पष्ट और डिजिटल रूप से सत्यापित प्रमाण देना होगा। यदि कोई किराएदार है, तो उसे रेंट एग्रीमेंट या मकान मालिक के घोषणा पत्र को डिजिटल रूप से अपलोड करना अनिवार्य होगा।
- 2. डुप्लीकेट एंट्री पर रोक: नए फॉर्म को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति एक राज्य से दूसरे राज्य में जाकर नया वोटर आईडी बनवाता है, तो सिस्टम स्वतः ही उसके पुराने पते के रिकॉर्ड को फ्लैग कर देगा, जिससे एक ही व्यक्ति के दो जगहों पर वोट होने की संभावना खत्म हो जाएगी।
- 3. अनाथ और बेघर युवाओं के लिए विशेष प्रावधान: पहली बार फॉर्म में अनाथालयों में रहने वाले या बेघर युवाओं के लिए एक विशेष कॉलम जोड़ा गया है, ताकि वे भी आसानी से अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।
डिजिटल इकोसिस्टम के अनुकूल
चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, नया फॉर्म-6 पूरी तरह से ‘वोटर हेल्पलाइन ऐप’ (VHA) और राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल (NVSP) के डिजिटल इकोसिस्टम के अनुकूल (User-friendly) बनाया गया है। अब 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवा अपने स्मार्टफोन से कुछ ही मिनटों में बिना किसी त्रुटि के फॉर्म भर सकेंगे।
सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को निर्देश दिया गया है कि वे वर्तमान में चल रहे ‘विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण’ (Summary Revision) अभियान में केवल इसी नए संशोधित फॉर्म का उपयोग सुनिश्चित करें। यह कदम फर्जी मतदान (Bogus Voting) पर कड़ा प्रहार माना जा रहा है।



