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अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत रचेगा नया इतिहास: 4 अगस्त को ‘मिशन आगमन’ के तहत लॉन्च होगा पहला निजी कक्षीय रॉकेट ‘विक्रम 1’

अभिषेक सिंह/  श्रीहरिकोटा/नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान और निजी एयरोस्पेस सेक्टर के लिए एक बेहद ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण करीब आ गया है। भारत का पहला पूरी तरह से निजी तौर पर विकसित कक्षीय रॉकेट (Orbital Rocket) ‘विक्रम 1′ (Vikram-1) अपनी पहली व्यावसायिक उड़ान के लिए पूरी तरह से तैयार है। आगामी 4 अगस्त 2026 को इस बहुप्रतीक्षित रॉकेट को इसके पहले मिशन—’मिशन आगमन’ (Mission Aagman)—के तहत सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में लॉन्च किया जाएगा।

इस स्वदेशी रॉकेट का निर्माण भारत की प्रमुख निजी एयरोस्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) द्वारा किया गया है। ‘मिशन आगमन’ केवल एक सामान्य लॉन्च नहीं है, बल्कि यह भारत के ‘न्यू स्पेस’ (New Space) युग के आगमन का सबसे बड़ा प्रतीक है। इससे पहले कंपनी ने ‘विक्रम-एस’ (Vikram-S) नामक सब-ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च करके अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया था, लेकिन ‘विक्रम 1’ एक पूर्ण कक्षीय रॉकेट है, जो पेलोड (उपग्रहों) को सीधे पृथ्वी की कक्षा (Earth’s Orbit) में स्थापित करने में सक्षम है।

तकनीकी विशेषताओं की बात करें तो ‘विक्रम 1’ एक मल्टी-स्टेज, सॉलिड-फ्यूल रॉकेट है। इसकी डिजाइनिंग और निर्माण में अत्याधुनिक कार्बन कंपोजिट सामग्री और 3D प्रिंटिंग तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया है, जो इसे हल्का और बेहद शक्तिशाली बनाता है। यह रॉकेट छोटे और मध्यम आकार के उपग्रहों को लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित करने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।

इस लॉन्च के साथ ही भारत दुनिया के उन गिने-चुने देशों की कतार में मजबूती से खड़ा हो जाएगा, जहां निजी कंपनियां व्यावसायिक अंतरिक्ष मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम दे रही हैं। ‘मिशन आगमन’ की सफलता से विदेशी उपग्रहों के प्रक्षेपण का रास्ता खुलेगा, जिससे भारत के अंतरिक्ष बाजार (Space Economy) में भारी विदेशी निवेश आने की उम्मीद है। इसरो (ISRO) और इन-स्पेस (IN-SPACe) के सहयोग से हो रहा यह लॉन्च भारतीय स्टार्टअप्स के लिए अंतरिक्ष की अनंत संभावनाओं के द्वार खोलने वाला साबित होगा।

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