यूपी चुनाव से पहले ग्राउंड रिपोर्ट: बीजेपी की बढ़त के बीच ‘पेपर लीक’ बना युवाओं की सबसे बड़ी चिंता

राघवेंद्र प्रताप सिंह: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों की सुगबुगाहट तेज होते ही राजनीतिक दलों ने अपनी गोटियां बिछानी शुरू कर दी हैं। इस बीच आई एक ताजा और विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट में राज्य के मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक मूड का एक दिलचस्प विश्लेषण सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, ढांचागत विकास, कानून-व्यवस्था और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के दम पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अभी भी चुनावी रेस में बढ़त बनाए हुए है। लेकिन इस चमक के पीछे एक ऐसा गहरा दर्द भी छिपा है, जो सत्ताधारी दल के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है—और वह है राज्य में बार-बार होने वाला ‘पेपर लीक’ और युवाओं में इसे लेकर बढ़ता आक्रोश।
विकास और कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर बीजेपी आगे
राघवेंद्र प्रताप सिंह की इस ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में सड़कों का जाल, एक्सप्रेसवे का निर्माण और कानून-व्यवस्था में सुधार को लेकर जनता के एक बड़े वर्ग में सरकार के प्रति सकारात्मक रुख है। विशेषकर महिला सुरक्षा और राशन वितरण जैसी योजनाओं ने जमीन पर बीजेपी की पकड़ को मजबूत बनाए रखा है। यही कारण है कि विपक्ष की तमाम लामबंदी के बावजूद, चुनावी गणित में बीजेपी अन्य दलों की तुलना में फिलहाल मजबूत और बढ़त की स्थिति में दिखाई दे रही है।
‘पेपर लीक’ और युवाओं का टूटता भरोसा
हालांकि, जब बात रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं की आती है, तो ग्राउंड रिपोर्ट की तस्वीर पूरी तरह बदल जाती है। पिछले कुछ समय में उत्तर प्रदेश में सिपाही भर्ती, आरओ/एआरओ (RO/ARO) और अन्य महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने की घटनाओं ने युवाओं के मन में एक गहरा असंतोष पैदा कर दिया है।
* कोचिंग हब में मायूसी: प्रयागराज, लखनऊ, जौनपुर और कानपुर जैसे प्रमुख कोचिंग सेंटरों में दिन-रात पसीना बहाने वाले छात्रों का कहना है कि बार-बार पेपर लीक होने और परीक्षाएं रद्द होने से उनकी उम्र भी निकल रही है और परिवारों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।
* भविष्य को लेकर अनिश्चितता: युवाओं में सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर है कि कड़ी मेहनत के बाद भी उन्हें निष्पक्ष परीक्षा प्रक्रिया मिलेगी या नहीं। यह मुद्दा जातिगत और क्षेत्रीय सीमाओं को तोड़कर सीधे तौर पर युवा मतदाताओं को प्रभावित कर रहा है।
चुनावी समीकरणों पर क्या होगा असर?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में युवा वोटर एक बहुत बड़ा निर्णायक फैक्टर हैं। विपक्ष (सपा, कांग्रेस और बसपा) इस युवा आक्रोश को भांप चुका है और उसने ‘पेपर लीक’ तथा ‘बेरोजगारी’ को अपना सबसे बड़ा चुनावी हथियार बना लिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बीजेपी समय रहते युवाओं के इस असंतोष को दूर करने के लिए कोई ठोस, पारदर्शी और ऐतिहासिक कदम नहीं उठाती है, तो यह मुद्दा उसकी मजबूत बढ़त को सीधे तौर पर चुनौती दे सकता है।
निष्कर्ष
अंततः, यूपी चुनाव की डगर बीजेपी के लिए पूरी तरह आसान नहीं है। विकास कार्यों की बदौलत वह रेस में आगे जरूर है, लेकिन युवाओं के रोजगार और परीक्षाओं की शुचिता का सवाल एक ऐसा अंडरकरंट (अंतर्धारा) है, जो किसी भी वक्त चुनावी बाजी को पलट सकता है। सरकार के लिए अब यह अनिवार्य हो गया है कि वह युवाओं के इस टूटते भरोसे को बहाल करने के लिए सख्त कानूनी और प्रशासनिक मिसाल पेश करे।



