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अयोध्या में सुरक्षा का नया ‘कवच’: रामलला परिसर में तैनात हुआ AI-आधारित ‘फेस रिकग्निशन’ सिस्टम, सावन की भीड़ को करेगा नियंत्रित

अभिषेक सिंह/ अयोध्या | श्री राम जन्मभूमि मंदिर में रामलला के दर्शन के लिए उमड़ रहे श्रद्धालुओं के सैलाब को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ा और हाई-टेक बदलाव किया गया है। वीकेंड (शनिवार-रविवार) और आगामी सावन के पवित्र महीने में लाखों की भीड़ के सुचारू प्रबंधन (Crowd Management) के लिए, उत्तर प्रदेश पुलिस और मंदिर ट्रस्ट ने आज पूरे राम जन्मभूमि परिसर में अत्याधुनिक ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) आधारित ‘फेस रिकग्निशन’ (Face Recognition) कैमरों का एक नया और शक्तिशाली नेटवर्क इंस्टॉल कर दिया है।

यह तकनीक न केवल श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, बल्कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि या आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए पुलिस को रीयल-टाइम (Real-time) डेटा भी मुहैया कराएगी।

कैसे काम करेगा यह नया ‘AI सुरक्षा चक्र’?

अयोध्या पुलिस रेंज के आईजी (IG) ने बताया कि यह नई प्रणाली केवल रिकॉर्डिंग करने वाले सामान्य सीसीटीवी कैमरों से कहीं अधिक उन्नत है। इसे सीधे राज्य पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के डेटाबेस से जोड़ा गया है।

इस नए सिस्टम की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

* संदिग्धों की तत्काल पहचान: इन कैमरों में लगे AI सॉफ्टवेयर की मदद से परिसर में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति के चेहरे को कुछ ही माइक्रो-सेकंड्स में पुलिस के क्रिमिनल और आतंकी डेटाबेस से मिलाया जाएगा। यदि कोई वांटेड अपराधी या संदिग्ध व्यक्ति भीड़ में छिपकर आता है, तो कंट्रोल रूम में तुरंत सायरन (Alert) बज जाएगा।
* भीड़ के दबाव (Crowd Density) का विश्लेषण: यह सिस्टम मंदिर के अलग-अलग हिस्सों (जैसे जन्मभूमि पथ, राम की पैड़ी और प्रवेश द्वार) में जमा हो रही भीड़ का रीयल-टाइम हीट मैप (Heat Map) तैयार करेगा। यदि किसी एक हिस्से में क्षमता से अधिक लोग जमा होते हैं, तो पुलिस को तुरंत अलर्ट मिलेगा ताकि वे रास्तों को डायवर्ट (Divert) कर भगदड़ जैसी स्थिति को रोक सकें।
* लापता बच्चों/बुजुर्गों की तलाश: भारी भीड़ में अक्सर बच्चे और बुजुर्ग अपने परिजनों से बिछड़ जाते हैं। अब परिजन बच्चे की तस्वीर कंट्रोल रूम में दे सकेंगे, और यह AI नेटवर्क पूरे परिसर में उस चेहरे को स्कैन कर मिनटों में बच्चे को ढूंढ निकालेगा।

सावन और ‘कलर-कोडेड पास’ की सफलता के बाद अगला कदम

यह हाई-टेक सिस्टम ऐसे समय में लागू किया गया है, जब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने हाल ही में ‘कलर-कोडेड’ पास व्यवस्था को सफलतापूर्वक लागू किया है (जिससे दर्शन का प्रतीक्षा समय 50% तक कम हुआ है)।

जुलाई के अंत में शुरू होने वाले ‘सावन’ के महीने में अयोध्या में हर दिन 3 से 5 लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। कांवड़ियों और आम भक्तों की भारी भीड़ के बीच, सुरक्षा बलों के लिए मैन्युअल रूप से चेकिंग करना लगभग असंभव हो जाता है। ऐसे में यह AI-सिस्टम पुलिस के लिए ‘तीसरी आंख’ का काम करेगा।

निष्कर्ष: आस्था और तकनीक का बेहतरीन संगम

राम मंदिर परिसर की यह नई सुरक्षा व्यवस्था दर्शाती है कि अयोध्या अब केवल एक पौराणिक और आध्यात्मिक नगरी नहीं रही, बल्कि यह भारत के सबसे सुरक्षित और स्मार्ट तीर्थ स्थलों (Smart Pilgrim Destinations) में से एक बन रही है। ‘फेस रिकग्निशन’ तकनीक के लागू होने से श्रद्धालु अब बिना किसी भय और सुरक्षा संबंधी चिंता के अपने आराध्य श्री राम के दर्शन कर सकेंगे। प्रशासन का यह कदम आस्था और आधुनिक तकनीक के बेहतरीन संगम का एक शानदार उदाहरण है।

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