INDIA गठबंधन की महाबैठक
दिल्ली में 23 विपक्षी दलों का जमावड़ा, आगामी चुनावों और संसद सत्र के लिए 'मास्टरप्लान' पर मंथन

नई दिल्ली (पल्लवी श्रीवास्तव): भारतीय राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रही निरंतर रस्साकशी के बीच आज देश की राजधानी नई दिल्ली में सियासी हलचल अपने चरम पर है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के खिलाफ एक मजबूत और एकजुट मोर्चा बनाने के उद्देश्य से गठित ‘इंडिया’ (INDIA – Indian National Developmental Inclusive Alliance) ब्लॉक की आज एक बेहद अहम और बड़ी बैठक आयोजित की जा रही है। इस महाबैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (SP), तृणमूल कांग्रेस (TMC), और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) सहित कुल 23 विपक्षी राजनीतिक पार्टियां हिस्सा ले रही हैं। यह बैठक इस मायने में भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आगामी राजनीतिक रणनीतियों, संसद के मानसून सत्र और देश के कई राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों की दिशा तय करेगी।
शीर्ष नेताओं की मौजूदगी और शक्ति प्रदर्शन
इस बैठक में विपक्ष के लगभग सभी बड़े चेहरे मौजूद हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास या पार्टी मुख्यालय पर हो रही इस बैठक में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, यूपी के पूर्व सीएम और सपा प्रमुख अखिलेश यादव, एनसीपी (NCP-SP) के वयोवृद्ध नेता शरद पवार, शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे, आरजेडी (RJD) नेता तेजस्वी यादव, झारखंड के सीएम चंपई सोरेन और लेफ्ट पार्टियों (CPI, CPI-M) के शीर्ष नेता शामिल हो रहे हैं। टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी और एमके स्टालिन जैसे दिग्गज नेताओं ने भी अपने विशेष प्रतिनिधियों को इस बैठक में भेजा है। इन 23 दलों का एक मंच पर आना यह संदेश देने की कोशिश है कि तमाम अंदरूनी मतभेदों के बावजूद विपक्ष का कुनबा भाजपा के खिलाफ मजबूती से खड़ा है।
बैठक का मुख्य एजेंडा: आगे की राह और चुनौतियां
सूत्रों के अनुसार, इस बैठक के एजेंडे में कई अहम और गंभीर विषय शामिल हैं। सबसे बड़ी चर्चा संसद के आगामी मानसून सत्र को लेकर है, जहां विपक्ष सरकार को नीट (NEET) परीक्षा विवाद, महंगाई, बेरोजगारी, और नए परिसीमन बिल जैसे ज्वलंत मुद्दों पर घेरने की संयुक्त रणनीति बना रहा है।
इसके अलावा, जिन राज्यों (जैसे महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड) में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने हैं, वहां गठबंधन के घटक दलों के बीच सीटों के तालमेल (Seat Sharing) और ‘न्यूनतम साझा कार्यक्रम’ (Common Minimum Programme) पर भी प्रारंभिक चर्चा हो रही है। इंडिया गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि राष्ट्रीय स्तर पर वे भले ही एक साथ दिखते हों, लेकिन राज्य स्तर पर उनके हित आपस में टकराते हैं।
एकजुटता पर सवाल और भविष्य की तस्वीर
हालांकि यह बैठक विपक्षी एकता का एक बड़ा मंच है, लेकिन गठबंधन के कुछ दलों के बीच चल रही खींचतान ने इस एकता पर सवाल भी खड़े किए हैं। कांग्रेस और टीएमसी के बीच बंगाल में, तो लेफ्ट और कांग्रेस के बीच केरल में जो सियासी दूरियां हैं, उन्हें पाटना मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के लिए एक बड़ी चुनौती है। आज की इस बैठक से जो निष्कर्ष निकलेगा, वह यह तय करेगा कि ‘इंडिया’ गठबंधन भविष्य में एक मजबूत राजनीतिक विकल्प बनकर उभरेगा या फिर अपने ही अंतर्विरोधों के बोझ तले दब जाएगा।



