जंतर-मंतर पर युवाओं का सैलाब: सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके का हल्लाबोल, सरकार के सामने रखीं ये 5 बड़ी मांगें

नई दिल्ली : देश की राजधानी दिल्ली का ऐतिहासिक जंतर-मंतर शनिवार को एक बार फिर बड़े आंदोलन का गवाह बना। देश में लगातार हो रहे पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में हजारों युवाओं ने हुंकार भरी। शनिवार सुबह दिल्ली पहुंचते ही अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर पर मोर्चा संभाल लिया। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच चल रहे इस आंदोलन में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग सबसे प्रमुखता से उठाई जा रही है। इस बड़े प्रदर्शन को प्रख्यात पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का भी समर्थन मिला है, जो खुद युवाओं का हौसला बढ़ाने जंतर-मंतर पहुंचे।
‘पोस्ट डिलीट कर दोगे, लेकिन मंच से कैसे मिटाओगे’ – अभिजीत दीपके
आंदोलन में उमड़े युवाओं के हुजूम को संबोधित करते हुए सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके ने सरकार और प्रशासन पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने कहा, “मेरे दोस्तों, यह संघर्ष लंबा चल सकता है। सोशल मीडिया पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को शुरू हुए एक महीना बीत चुका है, लेकिन कार्रवाई करने के बजाय हमारे सोशल मीडिया अकाउंट्स को हैक करने और पोस्ट को डिलीट करवाने जैसी कोशिशें की जा रही हैं। मैं साफ कर देना चाहता हूं कि आप डिजिटल दुनिया से हमारी पोस्ट हटा सकते हैं, लेकिन इस मंच पर खड़े हमारे बुलंद हौसलों को नहीं मिटा सकते।”
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के अलावा, प्रदर्शनकारी छात्र और अभिभावक सरकार के सामने पांच बड़ी मांगें रख रहे हैं, जो सीधे तौर पर देश के शिक्षा तंत्र और युवाओं के भविष्य से जुड़ी हैं:
बिना उचित ट्रेनिंग के शिक्षा का डिजिटलीकरण बंद हो
प्रदर्शन में शामिल हुए दिल्ली के राधेश्याम, जिनके तीन बच्चे हायर स्टडीज की पढ़ाई कर रहे हैं, ने शिक्षा के मौजूदा ढर्रे पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बैंकिंग से लेकर शिक्षा तक सबकुछ डिजिटल किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद धांधली और पेपर लीक जैसी गड़बड़ियों को रोकने में सिस्टम पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। युवाओं की मांग है कि शिक्षा क्षेत्र में कोई भी डिजिटल बदलाव करने से पहले शिक्षकों का उचित मूल्यांकन और उन्हें विशेष ट्रेनिंग दी जानी चाहिए।
अशांत मणिपुर में शिक्षा व्यवस्था को तुरंत पटरी पर लाया जाए
मणिपुर के रहने वाले और वर्तमान में नोएडा में काम कर रहे सामाजिक उद्यमी विन्सन ने आंदोलन में हिस्सा लेते हुए पूर्वोत्तर के छात्रों का दर्द बयां किया। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों से मणिपुर में फैली अशांति के कारण स्कूल, कॉलेज और शैक्षणिक संस्थान पूरी तरह ठप पड़े हैं। वहां के छात्रों का भविष्य अंधकार में लटक गया है। सीजेपी की मांग है कि मणिपुर में शिक्षा का सामान्य संचालन तुरंत सुनिश्चित किया जाए।
प्रतियोगी परीक्षाओं में आए पारदर्शिता और निष्पक्षता
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों और उनके परिवारों का दर्द भी इस आंदोलन में साफ दिखाई दिया। राजस्थान की मूल निवासी गायत्री सिंह ने बताया कि उनका भाई कोटा में रहकर तीन साल से नीट (NEET) की तैयारी कर रहा था, लेकिन पेपर लीक ने उसकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। युवाओं की मांग है कि देश में होने वाली सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में पूर्ण निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता बहाल की जाए ताकि किसी भी मेहनती छात्र के साथ अन्याय न हो।
छात्रों और अभिभावकों के जमीनी मुद्दों पर हो सीधी बात
रोहिणी से जंतर-मंतर पहुंचे 18 वर्षीय रौनक कुमार ने कहा कि वह शुरुआत में इस आंदोलन का हिस्सा बनने को लेकर संशय में थे, लेकिन यहां उठाए जा रहे मुद्दों ने उन्हें खींच लिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह राजनीति से परे हर उस छात्र और अभिभावक की लड़ाई है जो इस लचर व्यवस्था का दंश झेल रहे हैं। सरकार को हेडलाइंस बनाने के बजाय छात्रों को प्रभावित करने वाले वास्तविक संकट पर ध्यान देना चाहिए।
परीक्षाओं के दबाव और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की तय हो जवाबदेही
पेशे से मनोवैज्ञानिक सुंगधा ने इस आंदोलन की प्रासंगिकता पर बात करते हुए कहा कि सीजेपी का यह प्रदर्शन युवाओं को सोशल मीडिया के स्क्रीन से निकालकर जमीन पर लाने में कामयाब रहा है। आज देश में लाखों छात्र लगातार मानसिक दबाव और अवसाद से गुजर रहे हैं, कई मासूमों ने सुसाइड जैसा आत्मघाती कदम भी उठा लिया है। युवाओं की मांग है कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सरकार और परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।



